गाजियाबाद। शहर के लोगों को इस साल 100 करोड़ रुपये का झटका लगने जा रहा है। डेढ़ लाख नए भवनों को संपत्ति कर के दायरे में लाकर निगम अपनी आर्थिक स्थिति सुधारेगा। साथ ही, पुराने भवनों की नए सिरे से पैमाइश भी शुरू करा दी गई है। पिछले वर्ष 313 करोड़ रुपये संपत्ति कर वसूलने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे इस बार 400 करोड़ पार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
संपत्ति कर के पुराने बकायेदारों के साथ ही नए भवन मालिकों को भी बिल भेजे जा रहे हैं। डीएम सर्किल रेट के आधार पर चार गुना ज्यादा बिल भेजे जाने का मामला भी पार्षदों ने उठाया है। हालांकि, नगर निगम के अधिकारी बढ़ी दरों पर बिल नहीं जारी करने का हवाला दे रहे हैं। हर साल संपत्ति कर वसूलने के लिए शासन की तरफ से नगर निगमों को लक्ष्य दिया जाता है, लेकिन इस बार शासन की ओर से अभी तक कोई लक्ष्य नहीं दिया गया है। नगर निगम की तरफ से अपने स्तर पर ही पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 30 फीसदी अधिक कर वसूलने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। पिछले साल 313 करोड़ रुपये के सापेक्ष इस बार लगभग 413 करोड़ रुपये बतौर संपत्ति कर वसूले जाएंगे। वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 295 करोड़ रुपये संपत्ति कर नगर निगम को मिला था। 100 करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जीआईएस सर्वे के माध्यम से तलाशे के लगभग डेढ़ लाख भवनों और पुराने भवनों की संपत्ति के आकार की पैमाइश कराते हुए नए सिरे से वसूली की तैयारियां तेज कर दी गई है।
पैमाइश के आधार पर 2,193 नोटिस जारी
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के निर्देश पर संपत्तियों की समीक्षा का काम तेजी से किया जा रहा है। सभी जोनल प्रभारियों के नेतृत्व में टीमें स्थलीय निरीक्षण कर रही हैं। नए के साथ पुराने भवनों के आकार और क्षेत्रफल के अनुसार नए सिरे से संपत्ति कर के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र, हर्ष कंपाउंड अर्थला, आनंद औद्योगिक क्षेत्र मोहननगर, बुलंदशहर औद्योगिक क्षेत्र, कविनगर, लोहियानगर, विजयनगर के अलावा वसुंधरा जोन में होटल, रेस्टोरेंट और अस्पतालों सहित 2,193 भवन मालिकों को पैमाइश के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं।
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बकाया पर नहीं मिलेगी 20 फीसदी छूट
पिछले वित्तीय वर्ष में नगर निगम क्षेत्र में तकरीबन 4.52 लाख संपत्तियां थीं, जिनमें से 2.71 लाख संपत्तियों का कर जमा हुआ है। करीब 1.80 लाख भवन मालिकों ने तय समय पर संपत्ति कर का भुगतान नहीं किया। इन भवन मालिकों को बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज लगाकर नए बिल भेजे जा रहे हैं। नगर निगम ने 31 जुलाई तक 20 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया है, लेकिन यह छूट वित्तीय वर्ष 2024-25 की वर्तमान मांग पर ही मिलेगी। पुरानी बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना ही होगा।
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इस बार गांवों पर भी फोकस
नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 25 गांवों के लगभग 45 हजार भवनों की पहचान की जा चुकी हैं, इनमें 15 से 18 हजार भवनों से नगर निगम संपत्ति कर वसूली कर चुका है। गाजियाबाद नगर निगम के गठन के बाद 20 गांवों को इसमें सम्मिलित किया गया था। तब से लेकर अब तक केवल इक्का-दुक्का गांव ही संपत्ति के दायरे में थे, लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष में नगर निगम में 25 गांवों को सम्मिलित कर संपत्ति कर वसूलने की कवायद शुरू कर दी है।
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भवन मालिक अपनी संपत्ति का स्वयं मूल्यांकन कर नगर निगम के जोनल कार्यालय में संपत्ति कर जमा कर सकते हैं। बढ़ी हुई संपत्ति के आकार और प्रकार की पहचान के लिए नगर निगम की टीमें भी स्थलीय निरीक्षण कर रही हैं। - विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त