गाज़ियाबाद। 43 लाख संपत्ति कर बकाया होने पर नगर निगम ने सोमवार की सिद्धार्थ विहार स्थित प्रतीक ग्रैंड सिटी सोसायटी के सेल्स आफिस को सील कर दिया है। निगम की ओर से नोटिस चस्पा कर कहा गया है कि निगम से एनओसी प्राप्त करने के बाद ही संपत्ति की खरीद-फरोख्त की जाए। बकाया जमा नहीं करने पर कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
सिद्धार्थ विहार की प्रतीक ग्रैंड सिटी आवासीय योजना 2015-16 में लांच की गई थी। 2017-18 से लोग आकर रहने लगे थे। योजना के पहले फेज के कार्नेशिय और पियोनिया में करीब 3008 फ्लैट बने हुए हैं। मौजूदा समय में करीब 1500 फ्लैटों में करीब 6000 हजार लोग रह रहे हैं। नगर निगम ने 2016-17 से संपत्ति कर वसूली के लिए नोटिस दे रहा है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डाॅ. संजीव सिन्हा का कहना है कि बिल्डर को टैक्स जमा करने के लिए कई बार नोटिस भेजा गया लेकिन बकाया जमा नहीं किया गया। मौजूदा समय में सोसायटी 4346709 रुपये संपत्ति कर बकाया है। बिल्डर का सेल्स आफिस और दो दुकानें सील कर दी गई हैं। बकाया जमा करने के बाद ही सील खोली जाएगी।
सोमवार सुबह नगर निगम की टीम सोसायटी में पहुंची तो लोग मौके पर एकत्र हो गए। सीलिंग की कार्रवाई में मुख्यकर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा के अलावा विजयनगर जोनल कार्यालय की टीम और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।
हर फ्लैट से बिल्डर ले रहा तीन सौ रुपये
सोसायटी निवासी सुधाकर यादव ने बताया कि बिल्डर हर महीने पानी और अन्य सुविधाओं के नाम पर प्रत्येक फ्लैट से ढाई सौ से तीन सौ रुपये तक जमा करा रहा है। पिछले दो सालों में करीब एक करोड़ रुपये से अधिक बिल्डर सुविधाओं, नगर निगम और आवास विकास के नाम पर ले चुका है। जब बिल्डर निवासियों से शुल्क ले रहा है तो उसे जमा करने में क्या दिक्कत है। सोसायटी निवासी नंद नेगी का कहना है कि सीलिंग की कार्रवाई के बाद निवासी डरे हुए हैं।
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अभी 76 हजार बकायेदार
नगर निगम सीमा में करीब साढ़े पांच लाख संपत्तियां हैं। इस वित्तीय वर्ष में 230 करोड़ रुपये का वसूली लक्ष्य है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डाॅ. संजीव सिन्हा का कहना है कि वर्तमान में छोटे-बडे़ करीब 76 हजार बकायेदार हैं। टैक्स वसूली के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। 27 मार्च तक करीब 181 करोड़ की बकाया वसूली हो चुकी है। करीब 49 करोड़ की वसूली अभी बाकी है। 31 मार्च के बाद बकायादारों से 12 फीसदी ब्याज के साथ वसूली की जाएगी।
टॉप 10 बकायेदार
दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन 545609171 रुपये
एओसी हिंडन एयरफोर्य 209664000 रुपये
मानव संसाधन विकास केंद्र 115565016
रेलवे विभाग संपत्ति 85474864
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग 25660665
बिजली विभाग 924820171 रुपये
पुलिस कमिश्नरेट 63024088
जिलाधिकारी एवं जिला पंचायत कार्यालय 61101833 रुपये
जीडीए 58453937
जिला संयुक्त अस्पताल 3570336