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Ghaziabad News: बिजली आपूर्ति कर दी बंद... खाने-पीने का सामान खत्म

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लोनी। यमुना का तटबंध (पुश्ता ) टूट जाने से खादर के आठ गांवों में मुसीबत की बाढ़ आ गई है। इन गांवों से जुड़े तीन सब स्टेशन की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है ।पानी से घिरे घरों में फंसे लोगों का खाने-पीने का सामान भीग गया है। वे छत पर फंसे हैं और बाहर निकलना मुश्किल है। अगर किसी तरह बाहर निकल भी जाएं तो गांवों में दुकानें बंद हैं। कोई सामान मिल ही नहीं रहा है।
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मदद के लिए फोन करना भी मुश्किल है क्योंकि मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि राहत सामग्री पहुंचाई जाए। संकट यह भी है कि पशुओं को चारा नहीं मिल रहा है। अल्लीपुर, नौरसपुर, सुंगरपुर, पचायरा, मीरपुर हिंदू, बदरपुर, लुत्फुल्लापुर नवादा और हरमपुर में लोग बृहस्पतिवार की रात बाढ़ की दहशत में डूबे रहे। पूरी रात आंखों में कटी। बस यही देखते रहे कि पानी कितनी तेजी से बढ़ रहा है। इन गांवों के कुल 2380 लोग बाढ़ में फंसे हैं

ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार रात आठ बजे मंडोला व आवास विकास सबस्टेशन को बंद कर दिया था। दोनों सब स्टेशन में दस फीडर हैं। कुल 6149 कनेक्शन हैं। पानी भरने की सूचना पाकर लखनऊ से सिचाई विभाग से अिधकारी एके जैन पहुंचे और पुश्ते का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यमुना का जो स्तर है, उससे डेढ़ मीटर पानी ऊपर चल रहा है। इस स्थिति को कंट्रोल करने में एक से दो दिन लगेंगे।
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बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में घर पर प्रसव कराएंगी चिकित्सक



गाजियाबाद। लोनी के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में गर्भवती का घर पर ही प्रसव कराया जाएगा, जबकि किसी भी बीमार का इलाज भी डॉक्टर घर पर करेंगी। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाकर 397 लोगों को दवाइयां और क्लोरीन की गोलियां वितरित गई। जिला सर्विलांस अधिकारी (डीएसओ) डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में अगर किसी मरीज की हालत गंभीर होती है और उसे अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होने पर एंबुलेंस की मदद से पास के अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। 20 रैपिड रिस्पांस (आरआर) टीमें और 25 मोबाइल टीमों का गठन किया है। यह टीमें जलभराव से होने वाले संभावित संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने और 24 घंटे क्षेत्र में मरीजों की निगरानी करेंगी। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने बताया कि पानी भरने से कई तरह के संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बनी हुई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोनी में जांच शिविर लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई।






बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तैनात की टीमें

माई सिटी रिपोर्टर

गाजियाबाद।



जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह बाढ़ नियंत्रण एवं राहत के लिए किए जा रहे कार्यों एवं मौके की स्थिति के बारे में सीएम योगी आदित्यनाथ को विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए टीमें तैनात कर दी गई हैं ।ओखला सिंचाई एवं बागपत सिंचाई खंड के नियंत्रणाधीन बागपत के ग्राम सुभानपुर में बांध के टूटने से लोनी के आठ गांव प्रभावित हुए हैं। प्रभावित गांवों में अल्लीपुर, नौसरपुर, सुरंगपुर, पचायरा, मीरपुर हिंदू, बदरपुर, लुत्फुल्लारा नवादा, हरमपुर में करीब 2380 परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। उच्चतम बाढ़ स्तर 212. 15 मीटर पर है। 2013 में यह स्तर 211.4 मीटर था।



पंचायत घर पचायरा, पावी सादकपुर में सरदार पटेल जूनियर हाई स्कूल, बेहटा हाजीपुर में सेवा भारती प्राइमरी स्कूल में बाढ़ चौकी बनाई गई है। यहां पुलिस प्रशासन के साथ बचाव एवं राहत कार्य के सभी संसाधन मौजूद हैं। यहां से स्थिति पर हर पल नजर रखी जा रही। बैठक में पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा, सीडीओ विक्रमादित्य सिंह मलिक, एडीएम सिटी गंभीर सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक करीब 40 मिनट तक चली।


200 राहत किट तैयार

प्रत्येक किट में 10 किलो गेहूं, 10 किलो चावल, दो किलो अरहर की दाल, आलू 10 किलो, हल्दी 200 ग्राम, मिर्च 100 ग्राम, सब्जी मसाला 200 ग्राम, सरसों का तेल एक लीटर, नमक एक किलो, लाई-चना, गुड़ बिस्कूट, माचिस, मोमबत्ती, साबुन, जरी कैन एवं तिरपाल है। प्रभावित आठ गांवों के कोटेदारों के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण कराया जा रहा है। बाढ़ चौकियों में स्वास्थ्य विभाग की टीम दवाओं के साथ तैनात कर दी गई हैं। मेडिकल स्टाफ की रैपिड रिस्पांस टीम मौके पर मुस्तैद है। पीडितों के लिए स्वच्छ पेयजल और मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था की गई है। गौआश्रय स्थलों पर भूसा और चारे की व्यवस्था की गई है। बाढ़ चौकी पर पशु चिकित्सा अधिकारी की तैनाती की गई है। डीएम ने बताया कि एनएचएआई से सहयोग कर गिट्टी और राबिश के 20 डंपर की आपूर्ति की जा चुकी है। सात पोकलेन और जेसीबी मौके पर बचाव कार्य में जुटी है।










बाढ़ से ताजा हुए 45 साल पुराने जख्म



रिची कुमार



लोनी। शुक्रवार को जब लोनी के खादर क्षेत्र में बाढ़ आई, तो ग्रामीणों को 45 साल पहले की यादें ताजा हो गईं। 1978 में भी ऐसी ही बाढ़ लोनी के खादर क्षेत्र में आई थी। उस समय खजुरी पुश्ता बना था। इससे पानी शहरी इलाकों में नहीं पहुंच सका था। अब पुश्ता मार्ग पर निर्माण चल रहा है। इससे पानी आने का खतरा बन गया है।



खानपुर जप्ती गांव के पूर्व प्रधान जगत सिंह खारी ने बताया कि गांव में पानी आ चुका है। शुक्रवार सुबह जब वह उठे, तो उन्हें गांव में पानी मिला था। गांव में बाढ़ जैसे हालत हो गए हैं। 1978 में भी ऐसे ही पानी खादर क्षेत्र में आया था। उस समय इतनी बसावट नहीं थी। संसाधन भी नहीं थे। लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर थे। 16 लोग सभापुर गांव में पानी में डूबकर मरे थे। उस समय लोगों को निकालने के लिए नाव चली थी। आज भी यही स्थिति हैं। घरों में पानी भर गया है। लोग अपने घरों को छोड़कर जा रहे हैं। गांव में नाव चल रही है। धनेश्वर बागड़ी ने बताया कि 1978 में हिंडन में भी बाढ़ आई थी। गाजियाबाद तक पानी चला गया था। लोनी के कई गांव प्रभावित हुए थे। 1978 से पहले लोनी में कई बार बाढ़ आ चुकी थी। बाढ़ के पानी को रोकने के लिए खजुरी पुश्ता बांध बनाया था। तब से लेकर अब लोनी में बाढ़ आई है।




वीके सिंह ने हेलिकॉप्टर से किया दौरा



लोनी में पानी भरने पर क्षेत्रीय सांसद एवं सड़क परिवहन, राजमार्ग, नागर विमानन राज्यमंत्री वीके सिंह ने हेलिकॉप्टर से लोनी क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रवासियों की हर संभव मदद की जा रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को हर सम्भव मदद के लिए विश्वास दिलाया और कहा कि हर मुसीबत में मैं आपके साथ खड़ा हूं। तुम चिंता मत करना।




अलीपुर गांव में मकान गिरा, मीरपुर में दीवार



अलीपुर गांव निवासी सूरजमल का परिवार भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हुआ है। जलभराव के चलते उनका घर जर्जर होकर टूट गया है। समय रहते परिवार के सभी सदस्य बाहर आ गए। अब सूरजमल का परिवार बेघर हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उधर मीरपुर गांव में भी एक मकान की दीवार गिर गई है।
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