गाजियाबाद। नोएडा के निजी अस्पताल के कर्मचारी बृजेश कुमार से 14 मई को मोबाइल फोन लूट लिए जाने की वारदात की रिपोर्ट दर्ज करने में विजयनगर थाना पुलिस ने 100 दिन लगा दिए। बृजेश का कहना है कि पहले एक महीने तक उन्होंने थाने और चौकी के चक्कर काटे। इसमें निराशा मिलने पर पुलिस के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की। इसके भी दो महीने दस दिन बाद 24 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज की गई है। मोबाइल लूटने के बाद बदमाशों ने यूनाफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) की मदद से 10 हजार रुपये भी निकाले। नोएडा के निठारी सेक्टर 31 के निवासी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि वह अस्पताल से ड्यूटी करके घर जा रहे थे। विजयनगर थाना क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के पास दो बदमाशों ने उनसे मोबाइल फोन छीन लिया और भाग गए। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद यूपीआई आईडी लाॅक कराने के लिए साइबर कैफे गए। वहां जाकर पता चला कि बदमाश खाते से 10 हजार रुपये निकाल चुके हैं। वहां से वह विजयनगर थाना गए और लूट की तहरीर दी। पुलिस ने कह दिया कि जांच के बाद केस दर्ज कर लिया जाएगा। बृजेश का कहना है कि वह दो दिन बाद एफआईआर की काॅपी लेने गए तो उन्हें चौकी भेज दिया गया। चौकी के स्टाफ ने कहा कि लूट की नहीं, मोबाइल गुम होने की तहरीर दो तब रिपोर्ट दर्ज होगी। पुलिसकर्मी ने बोलकर बताया कि तहरीर में क्या लिखना है। उन्होंने गुमशुदगी की तहरीर देने से इन्कार कर दिया तो रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। थाने-चौकी के चक्कर काटने के बाद जब ऑनलाइन शिकायत की तो उनके पास पुलिस का फोन आया। उनसे कहा कि जल्द ही रिपोर्ट दर्ज हो जाएगी लेकिन इसके बाद भी दो महीने से ज्यादा का वक्त लगा।
जाओ, वकील से ही ले लो फोन
बृजेश ने बताया कि जब चौकी के स्टाफ ने मोबाइल गुम हो जाने की तहरीर देने का दबाव बनाया तो उन्होंने कह दिया कि वह वकील से बात करेंगे। इसके बाद ही निर्णय लेंगे। उनका आरोप है कि इतना सुनते ही पुलिसवाले भड़क गए। उनसे कहा कि जाओ, वकील से ही फोन ले लो। इसके बाद अभद्र भाषा में बात करने लगे। इस पर वे चले आए।
कराई जा रही है जांच : एसीपी
एसीपी नगर निमिष पाटिल का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। इसमें यह भी पता किया जा रहा है कि एफआईआर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों की गई ? लूट के खुलासे के लिए टीम लगा दी गई है। बदमाशों को चिन्हित करने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही वारदात का खुलासा होगा।