गाजियाबाद। दिवाली के बाद से हवा में बढ़ा जहर कम होने का नाम नहीं ले रहीं है। बृहस्पतिवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 376 दर्ज किया गया। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या 30 फीसदी बढ़ गई है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। इससे भी बड़ी परेशानी है कि एमएमजी अस्पताल में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। वहीं संयुक्त अस्पताल में सेवानिवृत्त होने के बाद दोबारा ज्वाइन करने वाले हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कात्याल ओपीडी में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ही मिलते हैं।
बृहस्पतिवार को एमएमजी अस्पताल में 1684 और संयुक्त अस्पताल में 1106 मरीज आए। इनमें से एमएमजी में 482 मरीजों का रक्तचाप बढ़ा हुआ पाया गया, वहीं संयुक्त अस्पताल में 356 मरीज उच्च रक्तचाप का इलाज कराने पहुंचे थे। जबकि 424 व 207 मरीज सांस लेने में परेशानी होने पर अस्पताल में इलाज कराया। क्रिटिकल केयर प्रभारी डॉ. अरविंद डोगरा का कहना है कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए एक सर्वे किया गया था। सर्वे में पता चला कि यह हृदयाघात और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी कारण हो रहा है। जिन लोगों को पहले से ही हृदय से संबंधित समस्याएं रही हैं, उनमें ये जहरीली हवा हृदयाघात के खतरे को बढ़ाने वाली साबित हो रही है।
बढ़ गई मरीजों की परेशानी
संयुक्त अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कात्याल का कहना है कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम 2.5, फेफड़ों और रक्तप्रवाह में चले जाते हैं। इससे न सिर्फ स्ट्रोक का खतरा होता है, बल्कि गंभीर स्थितियों में इसके कारण हृदय रोग, हृदयाघात और फेफड़ों की समस्याएं हो रही हैं। किसी भी प्रकार के हानिकारक सूक्ष्म कण जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के संपर्क के कारण समय के साथ गंभीर बीमारियों के बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है। डॉ. कात्याल ने बताया कि प्रदूषण के कण के हल्के स्तर के संपर्क में रहने से भी दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ रही है। एक घंटे भी प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से यह खतरा और बढ़ जाता है।