गाजियाबाद के लोनी में 30 जनवरी को एक फैक्टरी में मजदूर का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या करने की बात सामने आई। पुलिस ने जांच की तो हत्या का खुलासा हुआ। मजदूर के साथी ने ही हत्या की वारदात को अंजाम दिया।
गाजियाबाद के लोनी के आर्यनगर स्थित खेरात की फैक्टरी में मजदूर राजेंद्र की हत्या उसके ही साथी तरुण ने की थी। तरुण फैक्टरी की चाबी मालिक द्वारा राजेंद्र को सौंपने से नाराज था। तरुण ने फैक्टरी में पहले राजेंद्र को शराब पिलाकर नशे में किया फिर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया है।
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एसीपी रजनीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि 30 जनवरी को आर्य नगर स्थित जितेंद्र की खेरात की फैक्टरी में मजदूर राजेंद्र कुमार का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिला था। राजेंद्र मूल रूप से घोंडा के रहने वाले थे। हाल ही में वह लोनी विकास कुंज कॉलोनी में रहते थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजेंद्र की मौत गला दबाकर होना आया था।
इस संबंध में पुलिस टीम गठित कर मामले की जांच शुरू की गई। कुछ लोगों से पूछताछ में पता चला कि फैक्टरी की जिम्मेदारी राजेंद्र के साथी तरुण के पास थी। हत्या से चार दिनों पहले तरुण पर मालिक ने चोरी का आरोप लगाया था। मालिक ने तरुण से फैक्टरी की चाबी लेकर राजेंद्र को सौंप दी थी।
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इस बात को लेकर तरुण राजेंद्र से बैर रखने लगा। तरुण ने राजेंद्र की हत्या करने की योजना बनाई। 30 जनवरी को तरुण ने राजेंद्र को फैक्टरी में बुलाया और शराब पिलाई। शराब के नशे में होने पर तरुण ने राजेंद्र की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। एसीपी ने बताया कि मामले में तरुण को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।
हत्या के बाद दिल्ली चला गया था आरोपी
पुलिस के अनुसार तरुण हत्या करने के बाद दिल्ली स्थित अपने दोस्तों के पास चला गया था। वहां उसने अपना फोन बंद कर लिया था। तरुण ट्रॉनिका सिटी में रहता है। करीब चार वर्षों से इस फैक्टरी में काम कर रहा था। कई बार फैक्टरी में कीमती सामान चोरी होने पर मालिक नाराज था।
पुलिस के सवालों में उलझ गया, तो सच उगला
एसीपी ने बताया कि हत्या होने पर पुलिस ने अपनी तरफ से मामले में मुकदमा दर्ज किया है। परिजन पोस्टमार्टम के बाद शव को अपने गांव ले गए थे। हत्या के बाद पुलिस ने आसपास के लोगों ने पूछताछ की तो पता चला कि फैक्टरी में दोनों ही काम करते थे। 30 की शाम को दोनों साथ भी घूम रहे थे। हत्या के बाद तरुण ना तो फैक्टरी आया और ना ही मृतक के परिजनों से संपर्क किया।
तरुण को पुलिस ने किसी तरह पूछताछ के लिए थाने पर बुलाया। करीब 30 मिनट तक तरुण पुलिस को गुमराह करता रहा। तरुण ने पुलिस को बताया कि वह सुबह पांच बजे अपने घर चला गया था। इसके बाद उसे पता नहीं। पुलिस ने जब अपने सवालों में तरुण को उलझाया, तो उसने हत्या करना कबूल किया। तरुण को लगता था कि राजेंद्र ने मालिक से उसकी शिकायत की है।