गाजियाबाद। संयुक्त अस्पताल में पिछले पांच वर्ष (अप्रैल 2019 से मई 2023 तक) में किए गए 572 मरीजों के ऑपरेशन से मिलने वाली धनराशि ऑपरेशन थिएटर (ओटी) स्टाफ मिलकर डकार गया। मामले की जांच हुई तो संबंधित ओटी प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर कैथरीन जैकब को ओटी से हटा दिया गया है, जबकि तत्कालीन विभागाध्यक्ष (एचओडी) एनेस्थेटिस्ट डॉ. किशोर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडेय ने दो सदस्यीय टीम गठित कर पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट मांगी है।
572 में 339 बड़े ऑपरेशन और 133 छोटे ऑपरेशन थे। सरकारी दर के अनुसार बड़े ऑपरेशन का शुल्क फीस 399 रुपये और छोटे का 66 रुपये लिया जाता है। वर्ष 2020 में अस्पताल को कोविड लेवल-2 बना दिया गया था, उस समय सिर्फ संक्रमित मरीज भर्ती हो रहे थे, इस कारण से सामान्य ओपीडी और ऑपरेशन बंद थे।जांच के दौरान तत्कालीन नर्सिंग ऑफिसर कैथरीन जैकब ने सीएमएस को दिए जवाब में कहा है कि किसी भी ऑपरेशन की पर्ची कटने और कटवाने के लिए वह अकेली जिम्मेदार नहीं हैं। इसके लिए अस्पताल के सीएमएस, सर्जन, एचओडी एनेस्थेटिस्ट और पर्ची काटने वाले भी जिम्मेदार हैं।
जनरल ओटी इंचार्ज की जिम्मेदारी
ओटी इंचार्ज स्टाफ नर्स और एओडी एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी के डॉक्टर) होते हैं। इसमें शुल्क जमा करने की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स की होती है। गरीब, सरकारी कर्मचारी और लावारिस मरीजों के ऑपरेशन निशुल्क किए जाते हैं। पर्चे पर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक लिखित में निशुल्क ऑपरेशन की स्वीकृति देते हैं। अन्य ऑपरेशनों का शुल्क रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) में जमा होती है, जो अस्पताल में सुधार और आवश्यकता पर सीएमएस की सहमति से खर्च किया जाता है।
सामान्य जांच चल रही है
सीएमएस डॉ. विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि सामान्य जांच कराकर पता किया जा रहा है कि किस स्तर पर शुल्क जमा करने में गलती हुई है। यह विभागीय और गोपनीय मामला है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
सरकारी धन है, ब्याज सहित जमा करना होगा
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने कहा कि ऑपरेशन से मिले शुल्क को जमा करना होता है। पर्ची कटने या न कटने से कोई मतलब नहीं होता है। अगर शुल्क जमा नहीं किया गया है तो संबंधित से ब्याज सहित रिकवरी होगी। धनराशि जमा नहीं कराई गई तो संबंधित के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकती है।
ऑपरेशन के दौरान इन चिकित्सकाें की थी तैनाती
इन पांच साल में ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में डॉ. अखिलेश मोहन (अब सीएमओ मेरठ), डाॅ. सुधीर (अस्पताल छोड़ चुके), डॉ. योगेश (अस्पताल छोड़ चुके), डाॅ. संजय गुप्ता वर्तमान में संयुक्त और एमएमजी में कार्यरत, डॉ. मिलिंद गौतम एमएमजी में कार्यरत, डॉ. नरेश विज (तबादला आगरा), अब सेवानिवृत्त, डॉ. एसएन सिंह की तैनाती रही है। डॉ. एसएन सिंह ने सेवानिवृत्त होने के बाद दोबारा से अस्पताल में संविदा पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।