माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। भूखंड मिलने के बाद बार-बार दाम बढ़ाने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ग्राहक की सेवा में कमी मानकर यूपीएसआईडीसी को ब्याज समायोजित करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष प्रवीण कुमार जैन ने यूपीएसआईडीसी को पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में उपभोक्ता को देने का आदेश दिया है। ग्राहक शशिकांत को भूखंड की बकाया धनराशि यूपीएसआईडीसी में 3.6 लाख रुपये कराएंगे।
आईपी एक्सटेंशन दिल्ली निवासी शशिकांत ने 2005 में ट्रॉनिका सिटी योजना सेक्टर-नौ में 25 सौ रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से 200 वर्ग मीटर भूखंड के लिए आवेदन किया था। शशिकांत ने भूखंड के लिए 1.27 लाख रुपये की राशि यूपीएसआईडीसी में जमा करा दी। इसके बावजूद यूपीएसआईडीसी की तरफ दो वर्ष तक भूखंड का आवंटन नहीं किया गया। 2007 में यूपीएसआईडीसी ने शशिकांत को बताया कि उनको 3150 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से 150 वर्ग मीटर भूखंड आवंटित हुआ था, इसलिए उन्हें अतिरिक्त राशि देनी होगी। शशिकांत ने सहमति जताते दिसंबर 2011 तक किस्त जमा कर दी, इसके बाद यूपीएसआईडीसी की तरफ से भूखंड की कीमत 5500 वर्ग मीटर बताई गई। यूपीएसआईडीसी ने शशिकांत को बकाया राशि और ब्याज देने के लिए कहा। शशिकांत ने वर्ष 2019 में उपभोक्ता आयोग से की शिकायत की।