गाजियाबाद। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समानांतर ऑर्बिटल रेल चलाने की योजना को रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। मंगलवार को जीडीए सभागार में मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान हरियाणा रेल अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचआरआईडीसी) के अधिकारियों ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समानांतर करीब 135 किमी लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने का खाका पेश किया। छह महीने में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
हरियाणा ने सोनीपत से मानेसर होते हुए पलवल तक वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समानांतर लगभग 126 किलोमीटर लंबे ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड नाम से कंपनी का गठन कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। जब तक यूपी की सीमा में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समानांतर पलवल से ग्रेटर नोएडा, दादरी, गाजियाबाद, दुहाई और बागपत होकर सोनीपत तक ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का निर्माण नहीं होगा, हरियाणा को भी इस परियोजना का लाभ नहीं मिलेगा।
बीते फरवरी में यूपी के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की अध्यक्षता में बैठक के दौरान प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए एचआरआईडीसी को नामित किया गया था। फिजिबिलिटी रिपोर्ट किस तरह तैयार की जाएगी, इसकी समीक्षा के लिए पहली बैठक मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित हुई। हरियाणा मॉडल पर यूपी की सीमा में कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्तुतिकरण दिया गया। बैठक में एचआरआईडीसी, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण, राज्य सड़क परिवहन निगम, यूपीसीडा, एनएचएआई, एनसीआर सेल सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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हरियाणा के मॉडल पर किया मंथन
जिस तरह हरियाणा ने एसपीवी बनाकर कॉरिडोर बनाने की तैयारी की है, उसी मॉडल पर यूपी में भी काम करने की चर्चा हुई। एचआरआईडीसी की उप महाप्रबंधक आभा गुप्ता ने लगभग 135 किमी. लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर के एलाइनमेंट, फाइनेंशियल स्ट्रक्चर, कॉरिडोर के लाभ, स्टैक होल्डर, ट्रैफिक स्डडी, ड्रोन वीडियोग्राफी की जानकारी दी। हालाकि, प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत फिजिबिलिटी स्टडी के बाद डीपीआर तैयार होने पर ही तय की जा सकेगी, लेकिन हरियाणा के हिस्से में लगभग 126 किमी. लंबे कॉरिडोर के निर्माण में 5618 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसकी तुलना में यूपी की सीमा में कॉरिडोर की लंबाई आठ से दस किलोमीटर ज्यादा हो सकता है। ऐसे में यहां खर्च भी ज्यादा होने का अनुमान है।
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काम को गति देने के लिए बनेंगी समिति
एचआरआईडीसी के अधिकारियों ने बैठक के दौरान यूपी के अलग-अलग जिलों में संबंधित विभागों के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। अधिकारियों ने कहा कि प्रोजेक्ट की स्टडी, डाटा संकलन के लिए अलग-अलग टीमों की जरूरत होगी। मंडलायुक्त ने जीडीए, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण सहित अन्य विभागों को सहयोग करने के निर्देश दिए। जल्द ही कमेटियों का गठन कर दिया जाएगा।