धीरेंद्र मिश्र
गाजियाबाद। लोकसभा के 16 चुनावों में मात्र चार सांसद ही फर्स्ट डिवीजन ही पास हुए। हापुड़- गाजियाबाद सीट पर 1957 में हुए पहली बार हुए दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कृष्ण चंद शर्मा को 67.4 फीसदी लोगों ने वोट देकर जीत दिलाई। यह रिकॉर्ड 67 साल में अभी तक टूटा नहीं है।
समय के साथ जनता जनार्दन का रुख भी बदलता गया। आजादी के बाद कांग्रेस ने 17 साल तक एक छत्र राज्य किया। पंडित जवाहर लाल नेहरू की 1964 में मृत्यु होने के बाद कांग्रेस की बागडोर इंदिरागांधी के हाथों में आ गई। कई पुराने कांग्रेसी दिग्गज इस बात से खुश नहीं थे। नतीजा यह रहा कि कई क्षेत्रीय पार्टियों का उदय हो गया। इसके अलावा पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का चलन शुरू हो गया। 1971 में हापुड़-गाजियाबाद सीट से सात उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे लेकिन इस बार कांग्रेस को लोगों ने दिल खोलकर वोट दिए। इस बार भी कांग्रेस ने बाजी मार ली। कांग्रेस उम्मीदवार फर्स्ट डिवीजन से पास हो गए। इस चुनाव में भारतीय क्रांति दल के शेर कहे जाने वाले प्रकाश वीर शास्त्री को 32.1 फीसदी वोट ही मिले। इस साल चुनाव मैदान में चार निर्दलीय उम्मीदवार रहे। इसके अलावा आरपीआई से उम्मीदवार रहा। वरिष्ठ भाजपा नेता बलदेवराज शर्मा बताते हैं कि इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस पूरी तरह लड़खड़ा गई। कई दिग्गज पार्टी से अलग हो गए। कांग्रेस से बागी हुए कई दिग्गजों ने नई पार्टियां खड़ी कर लीं या नया ठिकाना तलाश लिया। नतीजा यह रहा कि 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। हापुड़-गाजियाबाद सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बीपी मौर्य को मात्र 30 फीसदी वोटों से संतोष करना पड़ा। जनता ने भारतीय लोकदल का साथ दिया और पार्टी से प्रत्याशी बनाए गए कुंवर महमूद अली को फर्स्ट डिवीजन से पास कर संसद पहुंचाया।
इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या आठ पहुंच गई। हालांकि इन सभी की जमानत जब्त हो गई। तीन साल बाद मध्यवधि चुनाव हुए। इमरजेंसी की पीड़ा अभी भी लोगों को साल रही थी। 1980 के चुनाव में लोगों ने कांग्रेस को नकार दिया और जनता पार्टी सेक्युलर को वोट देकर जिता दिया। हालांकि जीत का प्रतिशत काफी कम रहा। जीत का अंतर भी 1.3 फीसदी ही रहा। इस बार कांग्रेस को हराने के लिए 30 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक रहे थे। इनमें 27 प्रत्याशी निर्दलीय थे।
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42 साल बाद वीके सिंह चुनावी परीक्षा में आए फर्स्ट डिवीजन
1977 के बाद 2014 तक किसी भी दल को 60 फीसदी वोट नहीं मिले। 2019 में गाजियाबाद लोकसभा सीट पर दूसरी बार मैदान में उतरे जनरल वीके सिंह को जनता ने 62 फीसदी वोट देकर चुनावी परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन पास किया और संसद पहुंचाया।
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60 फीसदी से अधिक वोट पाने वाले सांसद
वर्ष सांसद पार्टी मत प्रतिशत
1957 कृष्ण चंद शर्मा (कांग्रेस) 67.4 फीसदी
1971 बुद्ध प्रिय मौर्य (कांग्रेस) 60.9 प्रतिशत
1971 कुंवर महमूद अली (बीएलडी) 62.0 फीसदी
2019 जनरल वीके सिंह (भाजपा) 62.0 फीसदी
1967 का नहीं टूटा रिकॉर्ड
1967 में हापुड़-गाजियाबाद सीट पर 70.09 फीसदी वोट डाले गए थे। यह रिकॉर्ड अभी तक टूटा नहीं है। सबसे कम वोटिंग 2009 में हुई थी। इस बार मात्र 45.30 फीसदी ही मतदान हुआ था।