गाजियाबाद। राज्यकर विभाग के खाते में जमा होने वाली एक हजार करोड़ से ज्यादा की रकम कई बड़ी कंपनियां अपने खातों में दबाए बैठी थीं। शासन के आदेश पर विभाग के अधिकारियों ने सख्ती की तो बीते पांच महीने में गाजियाबाद में 871 करोड़ की रकम कंपनियों से लेकर सरकार के खाते में जमा कराए जा चुके हैं। अभी कई बड़ी कंपनियां राज्यकर विभाग की रडार पर है।
राज्यकर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसी फर्म पंजीकृत हैं जो कच्चा माल खरीदकर लाती है और अपना उत्पाद तैयार करके बाजार में बेचती हैं। ऐसी कई फर्माें के कच्चे माल पर जीएसटी 12 या 18 फीसदी है, लेकिन जो उत्पाद तैयार करती हैं उस पर जीएसटी 5 फीसदी या टैक्स मुक्त हैं। ऐसी स्थिति में पोर्टल पर इन कंपनियों के लिए आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) दिखने लगता है, लेकिन उनके फाइनल उत्पाद टैक्स मुक्त हैं तो वह इस पर क्लेम नहीं ले सकती हैं। लंबे समय से ऐसी रकम पोर्टल पर तो दर्शा रही थी, लेकिन राज्यकर विभाग को नहीं मिल रही थी। कंपनियों ने इसका भुगतान नहीं किया था। कई कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें पांच या 12 फीसदी आईटीसी क्लेम लेना था, लेकिन उन्होंने ज्यादा ले लिया। जोन-दो की ऐसी कंपनियों को चिह्नित करके उनसे आईटीसी रिवर्सल के तहत 871 करोड़ रुपये सरकार के खाते में जमा कराए जा चुके हैं।
इन प्रमुख कंपनियों ने जमा कराई रकम
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने 608.71 करोड़ रुपये जमा कराए। बुलंदशहर-गाजियाबाद-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे नाम की फर्म ने 61.55 करोड़, मोहन मीकिंस लि. ने 28.60 करोड़, वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लि. ने 23.52 करोड़ रुपये, नरौरा पावर प्लांट ने 41.79 करोड़ रुपये, यशोदा मेडिसिटी 16.35 करोड़, यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल 7.87 करोड़ रुपये, पीएनआर अल्ट्राटेक ब्रांड्स क्रॉसले 8.94 करोड़ रुपये, रेस्तरां ब्रांड्स एशिया लि. 17.24 करोड़, क्रॉसले रेमिडीज लि. 15.95 करोड़, गुलशन होम्स प्रा. लि. 9.76 करोड़ और सब बोल्ट बिल्ड वर्ल्ड प्रा. लि. ने 7.27 करोड़ रुपये जमा कराए हैं।