लॉकडाउन में राशन और खाना न मिलने से परेशान मधुबन बापूधाम स्थित कांशीराम आवास के लोग
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सबहेड: कई क्षेत्रों में मदद को तरस गरीब व मजदूर, मुश्किल से मिल रही एक वक्त की रोटी - मधुबन बापूधाम कांशीराम आवास में बुजुर्ग, महिलाओं तक नहीं पहुंच रही सरकारी मदद - हरसांव सहित झुग्गियों में रहने वाले लोगों मुश्किलों से जूझ रहे, नहीं मिला राशन - लोनी के अगरोला गांव में कई प्रवासी मजदूर मांग कर कर रहे गुजारा माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोरोना वायरस को मात देने के लिए लॉकडाउन को एक माह पूरा हो गया है। लॉकडाउन का सबसे ज्यादा प्रभाव गरीबों, श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है। प्रदेश सरकार की ओर से गरीबों का पेट भरने के इंतजामों के कई दावे किए जा रहे हैं। लेकिन महानगर के तमाम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां जरूरतमंदों तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग जैसे तैसे एक वक्त की रोटी का इंतजाम कर गुजारा करने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन राशन कार्ड और बगैर राशन कार्ड धारकों को नियमित राशन की आपूर्ति की बात कह रहा है। लेकिन बगैर राशन कार्ड धारकों को तो छोड़े कार्ड धारकों तक को परेशानी उठानी पड़ रही है। महानगर की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के हालात बेहत खराब हैं। --- सीन-एक: कांशीराम आवास, मधुबन बापूधाम खाने और राशन को तरह रहे बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे मधुबन बापूधाम स्थित कांशीराम आवास में रहने वाले श्रमिकों के परिवारों, बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों का राशन न मिलने से बुरा हाल है। कांशीराम आवास में तमाम परिवारों को एक जून की रोटी तक मयस्सर नहीं है। भूखे लोग, महिलाएं व बच्चे खाना बांटने आने वाले लोगों की राह तकते रहते हैं। लेकिन बीते कई दिनों से लोगों के हाथ निराशा लगी है। राशन कार्ड धारकों को पूरा राशन नहीं मिल रहा है। जिन लोगों के राशन कार्ड नहीं है, वह लचर सरकारी मशीनरी का रोना रो रहे हैं। भूख से अब लोगों की हालत खराब होने लगी है। लोगों का कहना है कि सरकारी कर्मचारी झुग्गियों में लोगों के मदद की बात करते हैं, लेकिन यहां भूख से मर रहे लोगों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। --- सीन-दो, हरसांव की झुग्गियां 15 परिवारों के 80 लोग सरकारी मदद को तरसे हरसांव गांव के पास झुग्गियों में प्रवासी मजदूरों के 15 परिवारों के 80 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। मजदूरी करने और रिक्शा चलाने वाले इन परिवारों का लॉकडाउन ने काम छीन लिया। लॉकडाउन के 15 दिनों तक तो विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से खाना व राशन दिया, जिससे काम चला। अब बीते डेढ़ सप्ताह से हालत बहुत खराब है। केवल गांव वालों की मदद से एक समय की रोटी मिल पा रही है। सरकारी मदद न पहुंचने से यह परिवार परेशान दिखाई दिए। लोगों को जिला प्रशासन से उन्हें राशन मुहैया करवाने की मांग की। 112 नंबर पर भी मदद मांगी, लेकिन कोई आगे नहीं आया। --- सीन-तीन, अगरोला गांव लोनी प्रवासी 150 से ज्यादा मजदूरों की हालत खराब लोनी के अगरोला गांव में पूर्वी यूपी, बिहार के 150 से प्रवासी मजदूर अपने परिवार के साथ रहते हैं। फैक्ट्रियों में काम करने, मजदूरी करने और रिक्शा चलाने वाले इन लोगों का रोजगार तो लॉकडाउन ने छीन लिया। कमाई से करीब 15 दिन तो इन परिवारों ने जैसे-तैसे गुजारा कर लिया। लेकिन अब राशन व खाना नहीं मिलने से लोगों की हालत खराब है। मजदूर मजबूरी में अब अपना सामान तक बेचने को मजबूर हैं। इन मजदूरों से जिला प्रशासन से उन्हें राशन उपलब्ध कराने की मांग की। --- सीन-चार, साहिबाबाद रेलवे स्टेशन 40 झुग्गियों में रहने वाले लोगों का राशन खत्म, परेशानी साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास 40 झुग्गियों में तमाम परिवार रहते हैं। लॉकडाउन के बाद इन मजदूरी व फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों का काम छिन गया है। लॉकडाउन के बाद तमाम संगठन खाने और राशन के जरिए मदद के लिए आगे आए। लेकिन बीते दो सप्ताह से मदद के लिए लोगों का आना बंद हो गया है। ऐसे में जमा राशन भी अब लगभग खत्म हो चुका है। ऐसे में तमाम लोगों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई लोगों ने 112 नंबर पर भी सहायता मांगी, मगर हाथ खाली रहे। --- कोट्स: कोई तो मदद के लिए आगे आए 1. कांशीराम आवास में अधिकांश मजदूर, गरीब व बुजुर्ग रहते हैं। लोगों को सरकारी राशन सहित कोई मदद नहीं मिल रही है। राशन कार्ड नहीं है। राशन के लिए आवेदन किया तो लखनऊ से लिस्ट को मंजूरी की बात कही जा रही है। - उग्रसेन राय, कांशीराम आवास मधुबन बापूधाम 2. लॉकडाउन ने काम छीन लिया। अब बच्चों को दूध तो दूर एक वक्त का खाना मुश्किल से मिल रहा है। सरकारी कर्मचारी झुग्गियों में मदद की बात कह चले जाते हैं। उनकी परेशानी को कोई सुनने वाला नहीं है। - दुर्गा, कांशीराम आवास मधुबन बापूधाम 3. कांशीराम आवास में रहने वाले गरीबों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। पहले कई लोग राशन से मदद करके गए थे, लेकिन बीते दो सप्ताह से कोई नहीं आया है। प्रशासन को राशन की डोर-टू-डोर व्यवस्था करनी चाहिए। - सावित्री, कांशीराम आवास मधुबन बापूधाम 4. राशन तो दूर बच्चों को दूध तक नहीं मिल पा रहा है। जिला प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल रही है। कुछ लोग थोड़ा बहुत सामान लेकर आते हैं, लेकिन जरूरतमंदों की संख्या अधिक होने से परेशानी अधिक है। - गीता, कांशीराम आवास मधुबन बापूधाम 5. लॉकडाउन में अब तो राशन भी खत्म हो चुका है। 112 नंबर पर मदद मांगी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव वालों की मदद से एक वक्त के खाने का इंतजाम हो पा रहा है। - उमा, झुग्गी निवासी हरसांव 6. लॉकडाउन ने काम तो छीन ही लिया। अब खाने तक के लाले पड़े हुए हैं। सामाजिक संगठनों के लोग भी अब आना बंद हो गए हैं। जिला प्रशासन से राशन मिल जाए तो बहुत राहत मिले। - सुनील कुमार, झुग्गी निवासी हरसांव