मुरादनगर। दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में पूर्व थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुरादनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोप है कि दहेज उत्पीड़न मामला खत्म करने के नाम पर दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। करीब दो साल पहले रिश्ता तोड़ने के मामले में नौसेना कर्मी के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। आरोप है कि मुकदमा खत्म करने लिए हेड कांस्टेबल ने पीड़ित परिवार पर पैसे देने का दबाव बनाया था।
मुजफ्फरनगर की इंदिरा कॉलोनी निवासी व्यापारी रघुपाल सिंह का बेटा नौसेना में कार्यरत है। रघुपाल सिंह ने बताया कि उनके बेटे का रिश्ता वर्ष 2022 में मुरादनगर की एक कॉलोनी निवासी युवती से तय हुआ था। रस्म पूरी होने के बाद शादी की तारीख भी तय कर दी गई थी लेकिन किसी कारण दोनों के बीच विवाद होने के कारण रिश्ता टूट गया। इसके बाद लड़की पक्ष की ओर से दहेज मांगने का आरोप लगाते मुरादनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मुकदमे की जांच थाने में तैनात दरोगा लाल सिंह को दी गई थी। रघुपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने मुकदमे को फर्जी बताते सभी सबूत पुलिस को दे दिये थे। आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज होने के एक सप्ताह बाद थाने में तैनात हेड कांस्टेबल विकास कुमार का फोन आया कि थाने आकर मिलो। थाने में विकास कुमार व दरोगा लाल सिंह से मुलाकत हुई। विकास कुमार ने दहेज उत्पीड़न का केस खत्म करने के लिए रुपयों की मांग की। इसकी जांच बाद में दरोगा भुवनेश कुमार के पास पहुंची। आरोप है कि उन्होंने भी विकास के माध्यम से पैसे की मांग की थी। एसीपी नरेश कुमार का कहना है कि तहरीर के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी, तत्कालीन विवेचक, तत्कालीन पुन विवेचक भुवनेश कुमार व हेड कांस्टेबल विकास कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।
रघुपाल सिंह का कहना है कि मामले की जांच दरोगा भुवनेश कुमार कर हे थे, उन्होंने थाने पर बुलाया था। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सतीश कुमार ने कहा कि तुम लोग विकास की बात क्यों नहीं मान रहे। विकास की बात नहीं मानने पर अतिरिक्त धारा लगाकर जेल भेजने की धमकी दी गई। उधर, सतीश कुमार का कहना है कि आरोप निराधार है। दो बार जांच हो चुकी है। अब फिर से जांच होगी तो सच सामने आ जाएगा।
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डेढ़ साल बाद दर्ज हुई रिपोर्ट
रघुपाल सिंह का कहना है कि पुलिस द्वारा पैसे मांगने की शिकायत सीएम लेकर पुलिस के आलाधिकारियों की गई थी। आरोप है कि इसके बाद शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जाने लगा था। डीसीपी ग्रामीण ने सभी पुलिसकर्मियों की जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिये।
इन पर दर्ज हुआ केस
तत्कालीन थाना प्रभारी सतीश कुमार लाइन हाजिर हुए थे, अब उनकी तैनाती कोतवाली में है।
जांच अधिकारी लाला सिंह लाइन में है, भुवनेश कुमार मधुबन बापूधाम थाने में हैं।
हेड कांस्टेबल विकास कुमार अभियोजन कार्यालय गाजियाबाद में तैनात हैं।