गाजियाबाद। पांच साल की कवायद के बाद बनकर तैयार हुए मास्टर प्लान-2031 को जीडीए बोर्ड से भले मंजूरी मिल गई, लेकिन अब शासन स्तर पर इसमें आपत्ति लग गई है। यूपी के चीफ टाउन प्लानर कार्यालय में प्रजेंटेशन से पहले अब शासन ने जीडीए से कई बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी हैं। जीडीए अधिकारी सूचना भेजने के लिए कवायद कर रहे हैं। ऐसे में अब मास्टर प्लान लागू होने में और देरी हो सकती है।
जीडीए 2018 में मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। शहर में अगले 10 साल में होने वाले विकास का खाका खींचने के लिए बनाया गया यह मास्टर प्लान पांच साल बाद भी लागू नहीं हो पाया है। जीडीए ने लंबी कवायद और कई बार संशोधन के बाद बोर्ड सदस्यों से पास कराकर इस मास्टर प्लान को बीती जनवरी में शासन को भेज दिया था। अब शासन स्तर पर मानकों के अनुसार इसका परीक्षण किया गया। यहां इसमें कई आपत्तियां लग गई हैं। जीडीए के मुख्य नगर नियोजक अजय कुमार सिंह ने बताया कि शासन की ओर से मास्टर प्लान के संबंध में जो सूचनाएं मांगी हैं, उन्हें जल्द ही भेज दिया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के सीटीपी कार्यालय में इसका प्रजेंटेशन होगा।
बोर्ड सदस्य भी मास्टर प्लान पर उठा चुके सवाल
मास्टर प्लान के फाइनल ड्राफ्ट को शासन को भेजने से पहले जीडीए अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बोर्ड के कई सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। जीडीए बोर्ड में शामिल राजनीतिक सदस्यों ने भी इस पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना है कि अधिकारियों ने मास्टर प्लान में कई ऐसे बदलाव कर दिए हैं, जिनसे बिल्डरों को व्यक्तिगत रूप से फायदा पहुंच रहा है। जबकि नियमों के अनुसार यह बदलाव नहीं हो सकते हैं।