गाजियाबाद। हर साल 10 अप्रैल के बाद संपत्ति कर के नए बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार चुनाव के कारण इस पर रोक लगा दी है। चुनाव के बाद ही संपत्ति कर के नए बिल जारी होंगे। वहीं, संपत्ति कर के दायरे में लाने के लिए जीआईएस सर्वे जारी है। अब तक 1.50 लाख से ज्यादा भवनों की पहचान की जा चुकी है। नई संपत्तियों का ब्योरा जुटाने के लिए नगर निगम अपने स्तर पर भी सत्यापन करा रहा है। 80 हजार नए भवन मालिकों को 10 अप्रैल से मिलेंगे संपत्ति कर के बिल
शासन की ओर से वित्तीय वर्ष 2023-24 में 313 करोड़ रुपये संपत्ति कर वसूली का लक्ष्य तय किया था। 31 मार्च तक नगर निगम ने लगभग 295 करोड़ रुपये की वसूली की है। नगर निगम क्षेत्र में तकरीबन 4.52 लाख कुल संपत्तियों से कर वसूली की जानी थी, जिनमें से 60 फीसदी यानी करीब 2.71 लाख संपत्तियों का कर जमा हुआ है। करीब 1.80 लाख भवन मालिकों ने तय समय पर संपत्ति कर का भुगतान नहीं किया है। इनके अलावा जीआईएस और मैनुअल सर्वे के आधार पर लगभग 1.50 लाख नए भवनों की पहचान भी की गई हैं। इनमें आवासीय, औद्योगिक और वाणिज्यिक के अलावा बहुमंजिला आवासीय इमारतों के फ्लैट भी शामिल हैं। नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 25 गांवों के लगभग 50 हजार भवनों की पहचान भी की जा चुकी है। इस बार करीब दो महीने की देरी से संपत्ति कर के नए बिल जारी होंगे।
नगर निगम ने पिछले दिनों संपत्ति कर में बढ़ोतरी का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। हालाकि, पार्षदों ने डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति कर बढ़ाने के फैसले का विरोध जताया था। नगर निगम की बोर्ड कार्यकारिणी में एक अप्रैल से संपत्ति कर बढ़ाने के फैसले को टालने की बात कही गई थी, लेकिन इसको लेकर संशय बरकरार है। निगम की तरफ से संपत्ति कर के नए बिल बढ़ी दरों के लागू किए जाएंगे या नहीं, इस पर अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। चुनाव बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक का कहना है कि संपत्ति कर के नए बिल चुनाव बाद जारी होंगे।