गाजियाबाद। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चयनित बच्चों को दाखिला न देने वाले स्कूलों पर कार्रवाई के बजाय अफसरों ने पिछले सत्र की तरह ही इस बार भी नोटिस-नोटिस का खेल शुरू कर दिया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की ओर से 45 स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं। पिछले सत्र में ऐसे तमाम नोटिस के बावजूद सैंकड़ों बच्चों का दाखिला नहीं हो पाया था। दाखिला नहीं देने वाले स्कूलों पर कोई कार्रवाई भी नहीं की गई।
बीएसए की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है, आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया में आपकी ओर से जानबूझकर विलंब किया जा रहा है। इससे अभिभावक हताश हो रहे हैं। यह देरी इसलिए की जा रही है ताकि अभिभावक किसी और स्कूल में बच्चे का दाखिला कराने के लिए मजबूर हो जाएं। साथ ही स्कूलों के प्रधानाचार्यों से यह भी कहा गया है कि अभिभावकों से अनावश्यक कागजात मांगकर और सत्यापन के लिए उनके घर जाकर उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है। चेतावनी दी गई है कि अगर दाखिला नहीं किया तो स्कूल की मान्यता निरस्त करा दी जाएगी।
52 फीसदी बच्चों का नहीं हुआ दाखिला
आरटीई के तीन चरणों में 5,865 बच्चों का चयन स्कूलों में दाखिले के लिए किया गया है। अभी तक 2840 बच्चों का दाखिला स्कूलों में कराया गया है। लगभग 52 फीसदी बच्चों के दाखिले स्कूलों में नहीं हो पाए हैं। इसमें पहले चरण में 3721, दूसरे चरण में 1548 और तीसरे चरण में 596 बच्चे चयनित हुए थे। अभिभावकों का कहना है कि हर साल स्कूलों को नोटिस दिए जाते हैं। इसके अलावा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। नोटिस-नोटिस में ही पूरा साल चला जाता है।
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दाखिले न करने वाले स्कूलों को नोटिस देकर चेतावनी दी गई है। अगर स्कूलों ने अभी भी दाखिले नहीं किए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जल्द ही जिलाधिकारी के साथ बैठक भी होगी। - ओमप्रकाश यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी