स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया डाक्टरों का नंबर, नहीं उठा रहे फोन स्टोर संचालकों ने बंद किया दवाइयों पर छूट - माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। लंबे समय से बंद पड़े प्राइवेट और सरकारी अस्पताल के कारण मरीजों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। इस समस्या के निस्तारण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 17 सरकारी और 69 प्राइवेट डाक्टरों की लिस्ट जारी किया था। इसमें बताया गया कि डाक्टर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक मरीजों का टेलीफोनिक इलाज करेंगे, इसके बावजूद दूसरे दिन अधिकांश डाक्टरों ने फोन पिक नहीं किया। हालांकि कुछ डाक्टरों ने फोन पिक करने के साथ ही उपचार के लिए दवा भी बताई। निजी क्लीनिक बंद होने से स्टोर भी बंद लॉकडाउन में अधिकतर निजी डॉक्टरों के क्लीनिक बंद हैं। क्लीनिक के साथ उनके मेडिकल स्टोर भी बंद हैं। शहर के कई बड़े डॉक्टर तो अस्पताल भी नहीं जा रहे हैं। फोन के माध्यम से अधीनस्थों को निर्देशित कर रहे हैं। ज्यादातर बड़े डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, वह उनकी क्लीनिक के मेडिकल स्टोर में ही मिलती है। ऐसे में मरीज परेशान हैं। जबकि गाइडलाइन के मुताबिक मेडिकल स्टोर खुलने चाहिए। कई बार संबंधित दवा का साल्ट भी नहीं मिलता। मेडिकल स्टोर संचालकों ने बंद की दवाइयों पर छूट लॉक डाउन के शुरुआत में कई मेडिकल स्टोर ने दवाइयों पर 10 फीसदी से लेकर 20 फीसदी तक छूट दी, लेकिन धीरे- धीरे अधिकांश ने छूट समाप्त कर दी। स्टोर संचालकों का कहना है कि लॉक डाउन होने के बाद बहुत कम लोग दवाई लेने आ रहे हैं। इसके कारण स्टोर का बिजली खर्च और किराया भी नहीं निकल नहीं पा रहा है। अगर कुछ डाक्टर दवाइयां लिखते भी हैँ तो साल्ट मिलता है लेकिन वही नाम न मिलने पर मरीज दवाई लेते भी नहीं हैं। डाक्टर की लिखी दवाई न मिलने से भी भटकते हैं लोग लॉकडाउन के दौरान सरकार ने दवाओं की बिक्री के लिए छूट दे रखी है। इसके बावजूद लोग दवाएं नहीं मिलने से परेशान हैं। कुछ निजी चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाएं उन्हीं के क्लीनिक पर बने मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं, लेकिन उन मेडिकल स्टोर के बंद होने से लोग दवाओं के लिए भटक रहे हैं। दवा का नाम नहीं साल्ट देखें आईएमए अध्यक्ष डॉ. वीबी जिंदल का कहना है कि मेडिकल स्टोरों को खोला जाना चाहिए। कुछ क्लीनिक के अंदर बने मेडिकल स्टोर खुल भी रहे हैं। अगर कोई मेडिकल स्टोर बंद है तो दूसरी जगह से दवा खरीद लें। मरीज संबंधित साल्ट वाली दवा का प्रयोग कर सकता है। ब्रांडेट दवा के चक्कर में ना पड़ें।