गाजियाबाद। महिला अस्पताल में इलाज न मिलने से नवजात शिशु की मौत के मामले में सीएमओ ने जांच का आदेश दिया है। भाकियू (कृषक शक्ति) के पदाधिकारियों ने सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार को ज्ञापन देकर आरोप है कि गर्भवती को भर्ती करने के लिए सुविधा शुल्क की मांग की गई। प्रसव के बाद शिशु को इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई। सीएमओ ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
भाकियू (कृषक शक्ति) के जिलाध्यक्ष गजय ठाकुर ने बताया कि संगठन के जिला उपाध्यक्ष विशाल वैष्णव तीन जून को अपनी भाभी का प्रसव कराने जिला महिला अस्पताल ले गए थे। वहां प्रसव कराने के लिए अमित नामक कर्मचारी ने सुविधा शुल्क की मांग की। रुपये देने का वादा किया, इसके बाद गर्भवती को भर्ती किया गया। चार जून की सुबह महिला ने बेटे को जन्म दिया। शिशु की हालत खराब थी, उसे नर्सरी में भेजा गया। आरोप है कि नर्सरी में डॉक्टर नहीं थे। गंभीर हालत होने पर नवजात को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजन नवजात को संतोष अस्पताल ले गए। वहां भी उसे पर्याप्त इलाज नहीं मिला और दिल्ली रेफर कर दिया। रास्ते में ही नवजात की मौत हो गई। गजय ठाकुर का आरोप है कि महिला अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही के कारण नवजात की मौत हुई है। अस्पताल की नर्सरी में डॉक्टर ड्यूटी पर होते तो नवजात की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने अस्पताल में सुविधा शुल्क मांगने वाले कर्मचारी को खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
शिशु के फेफड़े में पहुंच गया था पानी
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुमाता तालिब का कहना है कि महिला ने दो बेटियों के बाद बेटे को जन्म दिया था। गर्भ में ही शिशु के सांस नली से फेंफड़े में पानी चला गया था। सामान्य प्रसव के बाद सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसे नर्सरी में भेजा गया था।
गंभीर हालत देखते हुए संतोष मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया गया था। वहां पर हालत में सुधार नहीं हुआ तो 24 घंटे बाद रेफर किया था। रास्ते में मौत हो गई। सीएमएस ने बताया कि मामले की तीन डॉक्टर महिला रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट से मामले की पूरी जांच भी कराई जा रही है।