गाजियाबाद। लंबी जद्दोजहद और बैठकों के कई दौर के बाद भाजपा ने रविवार रात मेयर प्रत्याशी के रूप में सुनीता दयाल के नाम पर मुहर लगा दी है। दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष सुनीता दयाल को यह टिकट मिला है। अंतिम दो दावेदारों में सुनीता दयाल के अलावा यशोदा अस्पताल के एमडी दिनेश अरोड़ा की पत्नी शशि अरोड़ा का नाम भी शामिल था, लेकिन उनके नाम पर पार्टी संगठन के कुछ पदाधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधियों ने भी सहमति जता दी थी।
मेयर के टिकट की दौड़ में 34 दावेदार थीं और इनमें निवर्तमान महापौर आशा शर्मा का नाम भी मजबूत दावेदारों में था। गाजियाबाद में कोर कमेटी की बैठक के बाद मेयर टिकट के पांच दावेदारों के नाम प्रदेश संगठन को भेजे गए थे। इनमें सुनीता दयाल और डॉ. शशि अरोड़ा के अलावा निवर्तमान मेयर आशा शर्मा, महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा की पत्नी और पूर्व मेयर दमयंती गोयल की पुत्रवधू का नाम भी शामिल था। पांच नामों में से दो नामों को शार्ट लिस्ट कर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के पास भेजा था। यहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय समिति के पदाधिकारियों ने इन दो नामाें पर मंथन किया गया। चर्चा है कि इन दो नामों में से एक नाम को चुनने के लिए पार्टी के पदाधिकारियों में भी लंबी खींचतान चली। सुनीता दयाल का नाम सबसे ऊपर होने के बावजूद दिल्ली में जाकर उनसे आगे डॉ. शशि अरोड़ा का नाम पहुंच गया था। इसके बाद फिर मंथन हुआ और कई दौर की बैठकों, विरोध और सहमति के बीच सुनीता दयाल के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी गई।
2004 में लड़ चुकी हैं विधानसभा उपचुनाव
सुनीता दयाल का लंबा राजनीतिक करियर रहा है। एबीवीपी से राजनीति की शुरूआत के बाद वह वर्तमान में भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले वह भाजपा के टिकट पर वर्ष 2004 में विधानसभा उपचुनाव लड़ चुकी हैं। कांग्रेस से विधायक रहे सुरेंद्र प्रकाश गोयल के 2004 में सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई शहर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में वह समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार मुन्नी से हार गई थीं। इस चुनाव में उन पर हमला भी हो गया था।
आशा को भी हुई निराशा
मेयर के टिकट की दौड़ में निवर्तमान मेयर आशा शर्मा को भी निराशा का सामना करना पड़ा। शहर में हुए विकास के दम पर उन्होंने दोबारा टिकट की दावेदारी की थी। वह पूर्व में नगर निगम की पार्षद भी रह चुकी हैं और उनका भी राजनीतिक करियर काफी लंबा रहा है। उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी उन्हें दोबारा प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारेगी।