गाजियाबाद में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजने के बाद दावेदारों की टिकट की दौड़ शुरू हो गई है। राजनीति में हाथ आजमाने वाले सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा से टिकट चाहते हैं। इसी का असर है कि नगर निगम के 100 वार्डाें से 1100 दावेदार अब तक आवेदन जमा कराकर टिकट की कतार में शामिल हो चुके हैं। मेयर पद के लिए 30 दावेदारों ने बायोडाटा संगठन के पदाधिकारियों को सौंपा है। नगर निगम के अलावा नगर पालिकाओं में भी अध्यक्ष और सभासद पदों के लिए भी टिकट पाने के लिए कार्यकर्ता हर जुगत लगा रहे हैं।
दरअसल, शहरी क्षेत्र में भाजपा का कैडर वोट अन्य राजनीतिक दलों की अपेक्षा ज्यादा है। इसी का असर है कि वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में नगर निगम के 100 वार्डों में से 57 पार्षद भाजपा के जीते थे। इसके बाद अन्य दलों के आठ पार्षदों ने दल बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया था। यानी निगम के सदन में भाजपा के 65 पार्षद हो गए थे। कई सीटें ऐसी थी जिनमें भाजपा के पार्षद महज 100 वोटों से भी कम अंतर पर हारे थे। दावेदारों को भाजपा के टिकट में अपनी जीत दिख रही है।
ऐसे में पार्षद और मेयर की कुर्सी पर बैठने की चाहत रखने वाले दावेदार भाजपा से टिकट पाना चाहते हैं। भाजपा के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा का कहना है कि नगर निगम के 100 वार्डाें में से टिकट पाने के लिए निवर्तमान पार्षदों समेत 1100 कार्यकर्ता बायोडाटा दे चुके हैं। अभी इनकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। मेयर पद के लिए 30 बायोडाटा मिल चुके हैं। खोड़ा-मकनपुर और मुरादनगर पालिका में सभासद और अध्यक्ष पद के दावेदारों की फेहरिस्त भी लंबी है। उनका कहना है कि खोड़ा-मकनपुर नगर पालिका में सभासदों के लिए 325 और अध्यक्ष पद के 17 दावेदार आवेदन कर चुके हैं। महिला के लिए आरक्षित मुरादनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद पर भी 12 महिला कार्यकर्ता आवेदन कर चुकी हैं।
टिकट कटने पर दल बदलने की भी है तैयारी
नगर निगम में कई पार्षद ऐसे हैं जिनके वार्ड में इस बार आरक्षण बदल गया है। इन वार्डों के निवर्तमान पार्षद अब अपने वार्डाें से खुद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। महिला के लिए आरक्षित वार्ड में निवर्तमान पार्षद अपनी पत्नी के लिए और अनारक्षित हो जाने पर भी आरक्षित वर्ग के लिए टिकट मांग रहे हैं। हालांकि भाजपा के पदाधिकारी चाहते हैं कि अनारक्षित सीटों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को उतारा जाए। भले ही क्षेत्र में ओबीसी या एससी वर्ग की आबादी ज्यादा हो। ऐसे में कई निवर्तमान पार्षदों के टिकट कटने तय माने जा रहे हैं। यह निवर्तमान पार्षद दूसरे दलों से भी संपर्क साध रहे हैं।