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Ghaziabad News: तेजी से कारोबार बढ़ाने वाली 200 से ज्यादा फर्म वाणिज्यकर विभाग की रडार पर

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गाजियाबाद। नोएडा में 15 हजार करोड़ के जीएसटी घोटाले के खुलासे के बाद गाजियाबाद में भी दो साल में तेजी से कारोबार बढ़ाने वाली 200 से ज्यादा फर्म वाणिज्यकर विभाग की रडार आ गई हैं। कई बिंदुओं पर की जा रही निगरानी के दौरान कई लेनदेन संदिग्ध मिलने पर इनको रेड फ्लैग फर्माें की सूची में डाला गया है। अब इनकी ओर से ऑनलाइन दाखिल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। इसमें फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई तो इन फर्माें के संचालकों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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दरअसल, कोरोना संक्रमण काल के दौरान कारोबार में आई सुस्ती के बावजूद कई फर्म ऐसी हैं, जिन्होंने नया पंजीकरण कराया और साल भर में ही 80 से 100 करोड़ का टर्नओवर कर लिया। इन 200 से ज्यादा फर्माें ने ई-वे बिल धड़ल्ले से जारी किए हैं। इनमें से कई फर्म ऐसी है जिन्होंने आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) क्लेम के तौर पर मोटी रकम विभाग से ली है। लेनदेन की सत्यता पर संदेह होने के बाद इन फर्माें को रेड फ्लैग सूची में डाला गया है। इनमें कई मैन्युफैक्चरिंग फर्म हैं तो कई ट्रेडिंग करने वाली फर्म शामिल हैं। विभागीय स्तर पर की जाने वाली जांच के दौरान खुलासा हो सकेगा कि कहीं बोगस फर्माें को पंजीकृत कराकर तो आईटीसी क्लेम नहीं ले लिया गया है। वाणिज्यकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर गोविंद बुधियाल का कहना है कि सभी खंड में फर्माें की ओर से किए गए लेनदेन की स्क्रीनिंग की जा रही है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद पता चल सकेगा कि लेनदेन में फर्जीवाड़ा किया गया है या नहीं। फर्जीवाड़ा करने वाली फर्माें को नोटिस जारी किए जाएंगे।

टैक्सी फर्म खोलकर की जा रही टैक्स जारी
वाणिज्यकर विभाग में टैक्सी फर्माें का पंजीकरण कराकर सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। अधिकारियों को कई ऐसी फर्म मिली हैं, जिनका पंजीकरण कराया गया और चार-पांच महीने में ही बड़ा लेनदेन कर फिर उन्हें बंद कर दिया गया। इन फर्माें से लेनदेन करनी वाली अन्य फर्माें ने आईटीसी क्लेम भी ले लिया। चंद महीनों में ही बंद हो जाने वाली इन फर्माें के पंजीकरण में फर्जी नाम, पता दर्ज कराया जाता है।
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मेरठ रोड की फर्म ने भी इसी तरह किया फर्जीवाड़ा
वाणिज्यकर विभाग के जोन-प्रथम क्षेत्र में मेरठ रोड पर बीते दिनों अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा कर 10 करोड़ का आईटीसी क्लेम लेने वाली एक फर्म पर कार्रवाई की है। क्लाउड स्पेस रेंट पर देने वाली इस फर्म की अभी तक की जांच में अधिकारियों को पता चला है कि इसने कई ऐसी फर्माें से लेनदेन किया है, जो पंजीकरण के बाद चंद महीने में ही बंद हो गई। गलत तरीके से जीएसटी क्लेम ले लिया गया है। इस फर्म ने पांच करोड़ रुपये विभाग में जमा करा दिए हैं। अभी जांच जारी है।
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