तीन कोच की मेट्रो ट्रेन शहर में 13 स्टेशनों के बीच चलेगी। एक ट्रेन में 700 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। शुक्रवार तक दुहाई डिपो में मेट्रो के 10 कोच पहुंच गए, दो अभी आने बाकी हैं। रैपिड की अधिकतम रफ्तार जहां 180 किलोमीटर प्रतिघंटा है, वहीं मेट्रो की अधिकतम परिचालन गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। इसकी टेस्टिंग लगातार हो रही है।
मेरठ सेक्शन में भूमिगत हिस्से में टनल निर्माण पूरा हो चुका है और एलिवेटेड हिस्से में वायडक्ट का निर्माण भी अंतिम चरण में चल रहा है। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर के बुनियादी ढांचे पर ही मेरठ मेट्रो ट्रेनें संचालित होंगी।
देश में एक कॉरिडोर पर दो तरह की ट्रेनें चलाने की अनोखी पहल है। मेरठ मेट्रो कॉरिडोर 23 किमी लंबा बनाया जा रहा है। इसमें 18 किलोमीटर एलिवेटेड और पांच किलोमीटर भूमिगत हिस्सा शामिल है। एनसीआरटीसी के साथ एल्सटॉम कंपनी का अनुबंध किया गया है। कंपनी 15 वर्षों तक ट्रेनसेटों का रखरखाव करेगी।
मेरठ के उत्तरी छोर को दक्षिणी छोर से जोड़ेगी मेट्रो
मेरठ मेट्रो, मेरठ के दक्षिणी छोर मेरठ साउथ को उत्तरी छोर मोदीपुरम से जोड़ेगी। इससे मेरठ और गाजियाबाद के लोगों को काफी सुविधा होगी। मेरठ मेट्रो ट्रैक यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशनों को एक से दो किमी के अंतराल पर बनाया जा रहा है।