सबहेड- श्रमिकों के रुकने, नियमित मेडिकल चेकअप व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना चुनौती - जीडीए की 29 सूत्रीय गाइडलाइन का बिल्डरों व ठेकेदारों को पालन करना है जरूरी - जीडीए की जांच में सभी व्यवस्थाएं मिली सटीक, तब मिल पाएगी निर्माण की मंजूरी माय सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोरोना महामारी चलते जारी लॉकडाउन के तीसरे चरण में जिला प्रशासन ने भले ही निर्माण की इजाजत दे दी हो, लेकिन निर्माण संबंधी जीडीए की शर्तों को लागू करना बिल्डरों और ठेकेदारों के लिए आसान नहीं होगा। जीडीए ने निर्माण कार शुरू करने संबंधी 29 सूत्रीय नियमावली को जारी कर दिया है। इनमें से श्रमिकों के साइट पर रुकने, नियमित मेडिकल चेकअप कराने व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना बिल्डरों के लिए चुनौती साबित होगा। कड़ी गाइडलाइन का असर है कि निर्माण के लिए आवेदन करने वालों का आंकड़ा दो अंकों तक नहीं पहुंच पाया है। दूसरी ओर ऑनलाइन आवेदन करने वालों की निर्माण साइट पर मजदूरों और श्रमिकों के रुकने, खाने-पीने के साथ सैनिटाइजेशन के पर्याप्त बंदोबस्त है कि नहीं इसकी जांच जीडीए की टीम को करनी है ।ऑनलाइन आवेदन होने के बाद जीडीए की टीम को 24 घंटे अंदर स्थलीय जांच कर निर्माण को मंजूरी देने का फैसला लेना है। ऐसे में साइट पर मानकों का पालन होने पर ही प्राधिकरण निर्माण की अनुमति देगा। जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि बुधवार को कुल 5 लोगों ने निर्माण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। जिस बिल्डर या फिर ठेकेदार को निर्माण करने की मंजूरी दी जाती है, उसकी साइट पर तय गाइडलाइन का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। -- श्रमिकों का नियमित मेडिकल चेक अप कराना है अनिवार्य जीडीए ने निर्माण की अनुमति संबंधी मानकों का पूरा प्रारूप अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। निर्माण संबंधी मंजूरी लेने के लिए बिल्डरों और ठेकेदारों को निर्माण की साइट पर उपस्थित पर उपस्थित होने वाला हर व्यक्ति एक फोटोयुक्त पहचान पत्र रखना अनिवार्य किया गया है। सभी मजदूरों व लोगों को सामाजिक दूरी के नियम का पालन करना होगा। निर्माण स्थल पर प्रत्येक व्यक्ति की थर्मल स्कैनिंग की जाएगी, बाद में प्राधिकरण की ओर से मांगे जाने पर यह ब्यौरा ठेकेदार को उपलब्ध कराना होगा। बिल्डर व ठेकेदार को साइट पर सैनिटाइजेशन के साथ प्रवेश द्वार पर हैंडवाश, पानी की व्यवस्था करनी होगी। कार्यस्थल पर सभी व्यक्तियों को मास्क पहनना अनिवार्य है। साइट पर काम शुरू होने से पहले सभी श्रमिकों का मेडिकल चेकअप कराया जाएगा। साथ ही रेंडम तौर पर 5 प्रतिशत श्रमिकों का आरटी-पीसीआर टेस्ट भी कराया जाएगा। इसके अलावा कर्मियों और श्रमिकों का चिकित्सा बीमा अनिवार्य किया गया है। अगर किसी प्रकार की भी बीमारी का लक्षण श्रमिकों में पाया जाता है तो बीमारी पूरा का खर्च बिल्डर या फिर ठेकेदार को उठाना होगा। अगर कार्यस्थल पर कोई कर्मचारी या फिर मजदूर तंबाकू का सेवन या फिर थूकता हुआ पाया जाता है तो भी दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान शामिल है। --