गाजियाबाद। नासिरपुर फाटक के पास बने रैन बसेरे में पिछले तीन साल से गद्दे नहीं बदले गए। फटे गद्दे से झांक रहे फाेम नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल रहे हैं। वहीं, टूटी खिड़कियों से सर्द हवाएं बसेरे में ठहरने वालों को ठिठुरा रही हैं।
सर्दी बढ़ने के साथ रात में हवाएं लोगों को ठिठुरा रही हैं। जिले का न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। बाहर से काम की तलाश में आए निराश्रित श्रमिकों के ठहरने के लिए नगर निगम की ओर से शहर में रैन बसेेरे बनाए गए हैं। पिछले साल शहर में 18 रैन बसेरे बनाए गए थे। इनमें 12 स्थायी और छह अस्थायी बसेरे हैं। इस साल भी निराश्रित लोगों को ठंड से बचाने के लिए रैन बसेरों को व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने नासिरपुर फाटक के पास आश्रय स्थल की पड़ताल की तो लापरवाही की तस्वीर दिखाई दी।
बसेरे में 32 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। गार्ड ने बताया कि गद्दे तीन साल पुराने हैं जो फट चुके हैं। चारपाई और तख्त की व्यवस्था नहीं है। नशेड़ियों ने आपस में लड़ाई कर खिड़की का कांच तोड़ दिया। सीसीटीवी लगे हैं लेकिन बंद हैं। टेलीविजन भी महीनों से बंद है। रेलवे ने रैन बसेरे के पीछे पेड़ कटवाया था, डाल छत पर गिरने से बसेरे के लिंटर में बड़ा होल हो गया है। बारिश में बसेरे के अंदर पानी भर जाता है। रसोई में फर्श कच्चा है। शौचालय गंदगी से बेहाल है। गार्ड ने बताया कि नशेड़ी यहां आकर नशा करते हैं, मना करने पर लड़ाई करते हैं। नए रेलवे स्टेशन के पास बने रैन बसेेरे में भी कंबल और गद्दे पुराने हो चुके हैं। यहां भी झुग्गी वाले अपना कब्जा जमाए हुए हैं। शाम को लाइट भी ठीक से नहीं जलती है। गार्ड ने बताया कि आधार कार्ड देखकर प्रवेश दिया जाता है। कार्ड नहीं होने पर किसी की पहचान बताना जरूरी है। पुलिस जिसे ले आती है उसे शरण दी जाती है।
खुले में रात बिता रहे निराश्रित
निराश्रितों के लिए बनाए गए रैन बसेरे शोपीस साबित हो रहे हैं। नेहरू नगर फ्लाईओवर, आरडीसी फ्लाईओवर, रेलवे स्टेशन रोड, बस स्टेशन के पास फुटपाथ और डिवाइडर पर काफी संख्या में निराश्रित खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं। इनकी सुध न तो नगर निगम को है और न पुलिस प्रशासन को।
रैन बसेरे में मानक
गैस सिलिंडर
सीसीटीवी कैमरे
कंबल, गद्दा
टीवी, चारपाई या तख्त
साफ शौचालय
प्रकाश के लिए खिड़की
शुद्ध पेयजल
प्रकाश व्यवस्था
खाना बनाने के लिए रसोई
उद्यान प्रभारी डाॅ. अनुज सिंह का कहना है कि रैन बसेरों को दुरुस्त करने की तैयारियां की जा रही हैं। पिछले साल 18 रैन बसेरे थे, इस बार कुछ अस्थायी रैन बसेरे ओर बढ़ाने पर विचार चल रहा है। जो कमियां हैं उन्हें एक हफ्ते में ठीक करा दिया जाएगा।