फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghaziabad News: पत्नी की राखी बिगाड़ने के लिए ही कराई थी मनोज की हत्या

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजियाबाद। तहसील सदर में बुधवार दोपहर दो बजे चैंबर में घुसकर की गई वकील मनोज चौधरी उर्फ मोनू की हत्या में नामजद उसके बहनोई अमित डागर, बहनोई के भाई नितिन डागर और दोस्त अनुज उर्फ पालू को पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि अमित के कहने पर नितिन ने मनोज को तमंचे से गोली मारी थी। हत्या के दौरान अमित और पालू चैंबर के बाहर मौजूद थे। अमित और नितिन भी पेशे से वकील हैं। अमित ने पूछताछ में बताया है कि उसने मनोज की हत्या पत्नी सरिता का रक्षाबंधन बिगाड़ने के लिए कराई।
विज्ञापन

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार पी. ने बताया कि इसकी वजह पूछे जाने पर अमित ने कहा कि सरिता से उसका विवाद चल रहा है। वह 24 जून से मायके में रह रही है। उनके दो बच्चों में बेटी सरिता के पास रहती है, जबकि बेटा उसके साथ रहता है। उसने सरिता से कहा था कि रक्षाबंधन पर बेटी को उसके पास भेज दे ताकि बेटे के हाथ पर राखी बंध जाए। सरिता ने इसके लिए साफ इन्कार कर दिया।
उसने उससे कई बार कहा, लेकिन जब वह नहीं मानी। इस पर उसे धमकी दी कि अगर उसके बेटे की कलाई सूनी रही तो वह उसे भी उसके भाई मनोज को राखी नहीं बांधने देगा। दोनों जगह राखी का त्योहार 31 को मनाया जाना था। इससे पहले ही 30 को मनोज की हत्या कराकर सरिता का रक्षाबंधन बिगाड़ दिया। उसे इसका कोई पछतावा नहीं है। मनोज चौधरी चार बहनों के इकलौते भाई थे। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से दो कार और तमंचा बरामद किया है। एक कार अमित के पिता मदन के नाम पर पंजीकृत है। दूसरी पालू की है।
विज्ञापन



बैठक के समय पर की हत्या : नितिन तहसील सदर में ही प्रैक्टिस करता है। उसने पूछताछ में बताया कि दोपहर दो बजे का समय ही हत्या के लिए उसने तय किया था। उसे मालूम था कि हापुड़ में वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर दो बजे तहसील के सभागार में बैठक है। ज्यादातर वकील बैठक में होंगे, इसलिए, हत्या करके भागने में आसानी रहेगी।



खाना खाते समय मारी थी गोली : गोविंदपुरम निवासी मनोज चौधरी की बुधवार दोपहर को हत्या उस समय की गई थी जब वह चैंबर में खाना खा रहे थे। उनकी पत्नी कविता ने सिहानी गेट थाने में अमित, उसके भाई नितिन, पिता मदन और दोस्त अनुज उर्फ पालू के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अमित नोएडा में वकालत करता है।



हत्या के बाद बदलते रहे ठिकाने

हापुड़, मेरठ और नोएडा गए


अमित और नितिन ने बुधवार सुबह चिरंजीव विहार में पालू को बुलाया। तीनों ने तय किया कि आज मनोज की हत्या हर हाल में करनी है।



तीनों घर से कार से निकले। रास्ते में तीनों ने शराब पी। अमित ने नितिन को तमंचा पकड़ाकर कहा कि गोली तुम्हें मारनी है। नितिन ने कहा, ओके, आईएम रेडी।



दोपहर डेढ़ बजे तहसील सदर के गेट पर पहुंच गए। वहां कार खड़ी कर दी। इसके बाद तीनों पैदल ही तहसील परिसर में मनोज के चैंबर के पास पहुंचे।



अमित और पालू चैंबर के बाहर खड़े रहे। नितिन तमंचा लेकर अंदर गया। उस समय मनोज खाना खा रहे थे। नितिन ने उनकी कनपटी से सटाकर गोली मार दी।



इसके बाद तीनों पैदल ही वहां से भागकर कार तक पहुंचे। कार से चिरंजीव विहार में घर चले गए। कार खड़ी करके ई-रिक्शा से दुहाई चले गए। तीनों मूल रूप से दुहाई के ही हैं।



दुहाई से पालू ने अपनी कार ली । इसके बाद तीनों गांव से निकल गए। वहां से मेरठ गए। मेरठ से हापुड़ पहुंचे और फिर नोएडा। इस तरह ठिकाने बदलते रहे।



बृहस्पतिवार को वापस गाजियाबाद आ गए। पुलिस को सूचना मिली कि तीनों को लोहियानगर में देखा गया है। वहां से तीनों को पकड़ लिया गया।



डेढ़ करोड़ की संपत्ति को बचाना भी मकसद

डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल ने बताया कि पूछताछ में अमित ने बताया है शादी के बाद से उसका पत्नी सरिता से विवाद चल रहा है। कई बार रिश्तेदारों ने समझौता कराया लेकिन बात नहीं बनी। उसका कहना है कि उसने सरिता के नाम दुहाई में करीब 90 लाख की कीमत का एक मकान और चिरंजीव विहार में 60 लाख की का फ्लैट करा रखा है। दोनों संपत्ति को सरिता मनोज की मदद से बेचने की फिराक में थी। उससे कई बार कहा कि संपत्ति को न बेचे लेकिन वह मान नहीं रही थी। मनोज से भी बात की लेकिन उसने भी एक न सुनी। उसे लगा कि अगर मनोज न रहे तो वह संपत्ति बेच नहीं पाएगी। इसलिए, मनोज की हत्या कर दी।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें