गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण काल में यात्रियों की संख्या घटने से मेट्रो संचालन में डीएमआरसी (दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन) को घाटा उठाना पड़ा। लगातार दो वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 में हुए परिचालन घाटे की भरपाई के लिए डीएमआरसी ने जीडीए से 302 करोड़ रुपये की मांग की है। डीएमआरसी जीडीए को दो बार पत्र लिख चुका है लेकिन रकम न दिए जाने पर अब मामला शासन के पास पहुंच गया है। शासन ने जीडीए उपाध्यक्ष से रिपोर्ट मांगी है।
दरअसल, मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण शुरू हो जाने के बाद लॉकडाउन हो गया था। इसकी वजह से अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ मेट्रो का संचालन भी कई महीने बंद रहा। लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की सुविधा कर्मचारियों को दे दी तो मेट्रो में यात्रियों की संख्या बेहद कम हो गई। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने भयावह रूप लिया तो अगले साल भी नौकरीपेशा लोगों ने घर से ही बैठकर काम किया। मेट्रो में भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ यात्रियों को सफर की इजाजत दी गई थी। इसकी वजह से अन्य रूटों के साथ-साथ दिलशाद गार्डन-शहीद स्थल मेट्रो रूट पर भी यात्रियों की संख्या कम हो जाने से डीएमआरसी को घाटा उठाना पड़ा।
डीएमआरसी के अधिकारियों ने अक्तूबर 2023 में भी जीडीए को पत्र भेजकर इस घाटे की भरपाई करने के लिए 302 करोड़ रुपये की डिमांड की थी। शासन को भी पत्र भेजा गया था। इस पर 16 नवंबर 2013 को शासन ने जीडीए उपाध्यक्ष को पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी थी। जीडीए अधिकारियों ने न तो रकम चुकाई और न ही शासन को रिपोर्ट भेजी। इसके बाद बीती 26 फरवरी को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने शासन को पत्र भेजकर रकम मांगी। अब बीते सप्ताह शासन के अनुसचिव किशलय सिंह ने जीडीए उपाध्यक्ष को पत्र भेजकर प्रकरण पर रिपोर्ट मांगी है।
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बयान
जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स का कहना है कि डीएमआरसी की ओर से प्राॅफिट जीडीए के साथ शेयर नहीं किया जाता है तो घाटे में भी जीडीए हिस्सेदार नहीं बनेगा। जीडीए ने पूर्व में भी डीएमआरसी के पत्र का जवाब भेज दिया था। अब दोबारा पत्र आया है तो जल्द ही डीएमआरसी और शासन को इसका जवाब भेज दिया जाएगा।