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लॉकडाउन ने बदरंग कर दी फूलों के किसानों की जिंदगी

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हिंडन किनारे गेंदे के फूलों के खेत - फोटो : AMAR UJALA
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रश्मि ओझा गाजियाबाद। लॉकडाउन ने जिले के फूलों की खेती करने वाले किसानों की जिदंगी बदरंग कर दी है। हालात यह है कि फूल खेत में ही बर्बाद हो रहा है। मंडी से लेकर बाजार तक कोई भी खरीददार नहीं है। गाजियाबाद में फूलों की खेती करनेवाले किसान हैरान-परेशान हैं। कोरोना के खिलाफ जंग में लॉकडाउन लगाया गया तो मंदिर बंद हो गए,शादियां टल गईं,जश्न पर ब्रेक लग गया। लेकिन जिन किसानों ने बैंकों से लोन लेकर फूलों की खेती की उनकी जिंदगी में वीरानी छा गई। उद्यान विभाग के अनुसार जिले में 10 हेक्टेयर में किसान फूलों की खेती करते हैं। इन फूलों को गाजीपुर फूल मंडी के अलावा शादी—ब्याह के मौके पर बैंकट हाल और फार्म हाउस में सजावट के लिए सप्लाई किया जाता है। लेकिन मार्च के बाद से ही सब कुछ बंद होने के कारण खेत में ही फूल सूख गए हैं। किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जिले से शासन को भी किसानों के नुकसान की रिपोर्ट भेज दी गयी है। पॉलीहाउस में फूलों की खेती करने वाले अनुज सिंह ने बताया कि अपना माल किसे बेंचे और कहां जाये। उनके सामने बड़ा संकट है कि वे इन फूलों का क्या करें। पहले जब फूल खिलता था तो फूल की तरह किसान भी खिल जाते थे लेकिन लॉक डाउन के बाद अब वही किसान जितना जितना फूल खिलता है, उतना ही उनका चेहरा मुरझा रहा है। लॉक डाउन होने के कारण उनका फूल मंडियों तक नहीं जा पा रहा है और फूल खेत पर ही सड़ रहा है। बाजार बंद होने के चलते माल न जा पाने के कारण फूल की खेती वाले किसान अब अपने फूल की फसल को उजाड़ रहे हैं। जहां पहले फूल की खेती वाले करने वाले किसान फूल से लाखों रुपए कमाते थे अब वही किसान पाई पाई को मोहताज नजर आ रहे हैं। हालात यहां तक पहुंच गये हैं कि उनके सामने रोजी-रोटी का भारी संकट खड़ा हो गया है। अनुज ने बताया कि फसल पूरी तरीके से तैयार हो चुकी थी और मार्च माह में पड़ने वाले नवरात्रों के लिए उन्होंने अपने फूल की फसल को रोका हुआ था। क्योंकि नवरात्र के दिनों में फूल की डिमांड बढ़ जाती है और उन्हें अनुमान था कि जो फूल नवरात्रों से पहले उनका 55 रुपये प्रति किलो जा रहा था,वह नवरात्रों के दौरान 80 रुपये प्रति किलो जाएगा। इस वजह से उन्होंने अपनी फसल को रोका हुआ था लेकिन नवरात्रों से पहले ही लॉक डाउन की घोषणा हो गई, जिससे उनका करीब 10 टन माल जो कि तैयार था बिक नहीं पाया और उन्हें करीब 6 से 7 लाख का नुकसान हुआ। फूल की खेती ही करीब 10 से 15 मई तक चलने वाली थी लेकिन मंडी में फूल नहीं जा पाने के कारण अब फूल की फसल खेत पर ही सड़ रही है। उन्होंने बताया कि जिले में फूल की खेती करने वाले किसाना और 20 पाली हाउस वालों को करोडों का नुकसान हुआ है। –-------/- मुकीमपुर गांव के किसानों को बड़ा घाटा मुकीमपुर गांव में सभी किसान गुलाब के फूलों की खेती करते हैं। नवरात्र से पहले और शादियों के सीजन के आने से पहले लॉक डाउन हो गया जिसके कारण सभी किसानों की फसल खेत में ही खराब हो गयी। किसान दीपेंद्र ने बताया कि वह 8 बीघे में फूलों की खेती करते हैं, पूरे गांव के किसान गुलाब के फूल ही उगाते हैं। पिछले 20 साल से खेती कर रहा हूँ लेकिन इस बार जितना घाटा हुआ है पहले कभी नहीं हुआ। गुलाब जल तैयार करने वाला एल प्लांट चल रहा है वहां हमने अपने फूल दिए जो महज पांच रुपये में लेता है। जबकि मंडी में हमारे फूल 25- 30 रुपए और शादियों के सीजन में तो 200 रुपये में बिकते थे। ...... जिले में लगभग 10 हेक्टयर जमीन पर फूलों की खेती होती हैं।फरवरी माह में कुछ माल बिके थे, लेकिन उसले बाद बाजार बंद हो गए। जिले में फूल की खेती करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत खेती का नुकसान हुआ है।इसकी रिपोर्ट शासन ने मांगी थी जो शासन को भी भेज दी गयी है। ओडी शर्मा,जिला उद्यान अधिकारी
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