गाजियाबाद। जिले में दो महीने से किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र की जांच नहीं हो रही है। प्री-कांसेप्शन एंड प्री डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (पीसीपीएनडीटी) विंग के विधि सलाहकार उमेश गुप्ता पर हमले के बाद से नोडल अधिकारी भी जांच के लिए जाने से बच रहे हैं। वारदात के बाद से किसी भी क्षेत्र में जांच नहीं की गई हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जांंच शुरू कराई जाएगी।
दीपावली से कुछ दिन पहले कुछ बदमाशों ने उमेश गुप्ता पर उस समय जानलेवा हमला किया था, जब वह सीएमओ कार्यालय से घर जा रहे थे। हमले में उमेश को गंभीर चोटें आने के साथ ही हाथ व पैर में फ्रैक्चर हो गए थे। अधिकारियों के अनुसार उमेश गुप्ता पर यह हमला लोनी के एक अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छापा मारने के बाद हुआ था। हमलावर अल्ट्रासाउंड केंद्र से ही जुड़े थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था लेकिन कुछ ही दिन बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। इस घटना के बाद से विभाग ने किसी भी केंद्र पर एक बार भी निरीक्षण नहीं किया। घटना के बाद से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में रोष है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि विभाग की ओर से सही पैरवी की गई होती तो हमलावरों की जमानत इतनी जल्दी नहीं हो जाती।
पीसीपीएनडीटी विंग के नोडल अधिकारी डॉ. चरण सिंह कहते हैं कि उमेश गुप्ता विधि सलाहकार हैं। छापेमारी की कार्रवाई के बाद उनके परामर्श से ही एफआईआर की कार्रवाई की जाती है। उनके नहीं होने से एफआईआर की कार्रवाई में परेशानी है इसलिए अभी छापा मारना बंद है। उमेश गुप्ता के स्वस्थ होकर काम पर आने के बाद दोबारा अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की जाएगी। नोडल का कहना है कि अगर शासन या प्रशासन का कोई विशेष अभियान चलता है तो जांच शुरू भी की जा सकती है।
वहीं, सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि जल्द ही केंद्रों की पड़ताल कराई जाएगी, अगर किसी केंद्र पर कोई कमी मिलेगी तो उसके संचालक के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।