फोटो सहित हर कदम मुश्किल, आसान नहीं इंडस्ट्री की राहें - आज से शर्तों के साथ शुरू होंगे जिले के 13 हजार से अधिक उद्योग - कोरोना टेस्ट, 50 फीसद लेबर सहित अन्य जटिलताएं बनेंगी बाधा माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। लॉकडाउन में बंद उद्योगों को सोमवार यानि आज से सशर्त शुरू कराया जा रहा है लेकिन इन शर्तों के मुताबिक उद्योगों के शुरू होने की राह आसान नहीं है। रविवार को दोपहर तक उद्योग शुरू होने के लिए पोर्टल लिंक शुरू नहीं हो सका था। उद्यमी जिला उद्योग केंद्र की वेबसाइट पर इसका इंतजार करते रहे। उद्योगों को शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती श्रमिक हैं, जिनका पूरा ध्यान उद्यमियों को रखना है। गाजियाबाद में करीब साढ़े तेरह हजार पंजीकृत उद्योग हैं। इसके अलावा अपंजीकृत व अन्य सेवा क्षेत्रों को मिलाकर देखें तो इनकी संख्या 35 हजार के करीब है। लॉकडाउन के लगभग 25 दिन बाद उद्योगों को शुरू करने की कवायद अब शुरू हुई है। उद्योगों को सैनिटाइज्ड करने के अलावा आधे श्रमिक, श्रमिकों की थर्मल स्कैनिंग से जांच, श्रमिकों के लिए भोजन, माल की ढुलाई के लिए अधिक बार वाहनों का प्रयोग न करने जैसी शर्तें हैं। औद्योगिक संगठनों का कहना है सबसे कठिन शर्त कम से कम पांच और ज्यादा से ज्यादा दस श्रमिकों को जिला अस्पताल में जांच कराना है। श्रमिक के घर जाने के बाद अगर वो बीमार होता है तो पूरे औद्योगिक क्षेत्र को नुकसान होगा और श्रमिक भी अस्पताल जाकर जांच कराने में डरेंगे। उद्यमियों का कहना है भले ही कम श्रमिकों को लेकर कार्य कराया जाए लेकिन श्रमिकों की जिम्मेदारी इंडस्ट्री पर ना डाली जाए। --- गाजियाबाद में इंडस्ट्री लोहा, स्टील उत्पाद- 7000 इंडस्ट्रियल कैमिकल- 2500 ऑटो पार्ट्स- 150 खाद्य प्रसंस्करण- 297 औषधि- 56 सर्जिकल उपकरण- 52 अन्य- 3000 --- उद्यमी कम श्रमिकों के साथ कार्य करने को तैयार हैं लेकिन शर्तों में थोड़ी छूट भी जरूरी हैं। श्रमिकों की थर्मल स्कैनर से जांच, भोजन सब व्यवस्थाएं हो जाएंगी। रविवार को पोर्टल भी दोपहर तीन बजे तक शुरू नहीं हुआ। राजीव अरोड़ा, महासचिव इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन --- उद्यमी होने के नाते मेरा मानना है कि फैक्टरी चलाना अत्यंत आवश्यक है। मानवता और सरकारी दोनों ही आधार पर निर्णय लेने होते हैं। सशर्त यूनिट को चलाने की होड़ से बचना चाहिए। साथ ही एमएसएमई को सरकार से सहारे की उम्मीद है। साकेत अग्रवाल, वाइस चेयरमैन इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन