गाजियाबाद। भूखंड लेकर तय समय में शुरू नहीं होने वाली औद्योगिक इकाइयों की बैंक गारंटी जब्त की जाएगी। जनपद में ऐसी 400 से अधिक इकाइयों की पहचान की गई है। जिला उद्योग केंद्र की तरफ से इन इकाइयों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जिन उद्यमियों ने भूखंड आवंटन के पांच वर्ष के अंदर अपनी इकाई को क्रियाशील कर दिया है, उन्हें बैंक गारंटी अवमुक्त कराने के लिए अंतिम अवसर दिया गया है। ऐसी इकाइयों के लिए एक महीने में आवेदन करना होगा।
औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2012, 2017 और एमएसएमई नीति 2022 के अंतर्गत नई औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए आवंटित भूखंड के पट्टा विलेख के समय स्टांप शुल्क में 100, 75 और 50 प्रतिशत छूट का लाभ दिया गया था। स्टांप शुल्क छूट की धनराशि के सापेक्ष आयुक्त स्टांप उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी के पक्ष में बैंक गारंटी बंधक रखी गई है। नियमों के अनुसार स्टांप शुल्क में छूट का लाभ प्रयोजनन की पूर्ति किए जाने यानी भूखंड पर उद्योग क्रियाशील होने पर ही प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद ही बैंक गारंटी को अवमुक्त कराया जा सकता है। शासनादेश के अनुसार इकाई और प्रमाणीकरण संस्था के मध्य किए गए अनुबंध के अनुसार अधिकतम पांच वर्ष में इकाई को क्रियाशील किया जाना आवश्यक है।
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पांच वर्ष से ज्यादा नहीं मिलेगा समय
जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त श्रीनाथ पासवान ने बताया कि ऐसी 400 से अधिक इकाइयां हैं जिन्होंने स्टांप शुल्क छूट की धनराशि के सापेक्ष बैंक गारंटी बंधक रखी हुई है। इनमें कई इकाई क्रियाशील नहीं हुईं और बैंक गारंटी की अवधि समाप्त हो गई। इन इकाइयों को निर्धारित पांच वर्ष से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगा और बैंक गारंटी जब्त की जाएगी। ऐसी भी इकाई हैं जो क्रियाशील तो हो गईं लेकिन बैंक गारंटी अवमुक्त कराने के लिए आवेदन नहीं किया। ऐसी इकाइयों को एक माह के अंदर आवेदन करने का अंतिम अवसर दिया गया है।
क्या है बैंक गारंटी
औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोस्तसाहन नीति और एमएसएमई नीति के अनुसार उद्यमी को स्टांप ड्यूटी छूट का लाभ उठाने के लिए बैंक गारंटी प्रदान करता है। नीति में कहा गया है कि बैंक गारंटी स्टांप शुल्क छूट से मेल खानी चाहिए। तय समय में इकाई क्रियाशील होने के बाद इसे अवमुक्त कराया जा सकता है। उत्पादन शुरू होने की पुष्टि या तो जिलाधिकारी या जिला उद्योग केंद्र करता है।