गाजियाबाद। तालाबों की सफाई में गलत रिपोर्ट देने पर और फरीद नगर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नहीं बनाने पर जिलाधिकारी को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने फटकार लगाई है। एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर क्यों न आपको छह साल के लिए जेल भेज दिया जाए। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि तीन महीने के अंदर तालाबों की सफाई और फरीदनगर में एसटीपी बनाए जाने की कार्ययोजना पेश करें नहीं तो सात मई को सुनवाई के समय प्रमुख सचिव नगरीय विकास प्राधिकरण अदालत में पेश हों। एनजीटी ने तालाबों की सफाई पर खर्च किए गए 17 लाख रुपये की गलत रिपोर्ट पेश करने पर जिलाधिकारी और फरीदनगर नगर पंचायत परिषद के अधिकारियों को फटकार लगाई है। एनजीटी ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि तालाबों की सफाई पर जितना खर्च दिखाया गया है उससे सस्ते में तालाबों को दूध से भरा जा सकता था।
सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश शर्मा की तरफ से जनहित याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता गौरव शर्मा ने बताया कि एनजीटी ने तालाबों की खराब स्थिति पर असंतोष जताया था। गौरव शर्मा ने बताया कि सुनवाई के दौरान यह बताया गया कि एनजीटी के सामने संयुक्त समिति ने 18 मार्च को 14 तालाबों की स्थिति पेश की थी। उसमें कुछ अलग तथ्यों की जानकारी मांगी गई थी। 29 जनवरी को नगर पंचायत परिषद के अधिकारी ने बताया कि खसरा नंबर 585 और 980 पर स्थित तालाब के कीचड़ और पौधे की सफाई पर 17. 62 लाख खर्च किए गए थे, जबकि चार्ट में जो जानकारी दी थी उसके अनुसार यह तालाब सूखे हुए हैं। कोर्ट ने जवाब मांगा कि जब तालाब सूखे थे तो किस प्रकार की सफाई की गई है। इससे लगता है कि नगर पंचायत परिषद फरीदनगर ने 17 लाख खर्च की जो जानकारी दी है वह गलत है सिर्फ टेंडर मांगे गए थे। इसके अलावा बताया गया कि कुछ तालाबों पर अवैध कब्जे काफी पुराने हैं और इनको कब्जा मुक्त कराने में समय लगेगा। वर्चुअल सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए जिलाधिकारी ने अदालत को बताया कि एसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए यूपी जल निगम डीपीआर तैयार कर रहा है। इसकी अनुमानित लागत 22 करोड़ रुपये है।