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Ghaziabad News: आत्महत्या के लिए उकसाने वाले दोषी पति को सात साल की सजा

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गाजियाबाद। विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी पति को एडीजे थर्ड न्यायाधीश रीता सिंह की अदालत ने सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में नौ गवाह पेश किए गए। मामला मोदीनगर थाना क्षेत्र का है।
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जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन शर्मा ने बताया कि लोनी निवासी भारतीय दूरसंचार विभाग में कर्मचारी के पद पर काम करने वाले राजपाल सिंह ने अपनी बेटी सुमन की शादी 27 अप्रैल 2005 को मोदीनगर निवासी पवन के साथ की थी। पवन पेंटिंग का काम करता है। पिता ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया बेटी के शादी में मिले दहेज से पवन कुमार खुश नहीं था। वह शादी के बाद से लगातार दहेज की और मांग करने लगे। सुमन के पिता ने बेटी की खुशी के लिए पवन को तिबड़ा मोदीनगर में एक प्लाट खरीदकर दे दिया था। साथ ही प्लाट पर मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद भी की, लेकिन पवन की दहेज की मांग बंद नहीं हुई। वह सुमन की शराब पीकर पिटाई करता था। बावजूद इसके पवन की डिमांड कम नहीं हुई। वहीं, पवन और सुमन की दो बेटी भी हो गई। वह आए दिन सुमन को शराब पीकर बुरी तरह पिटता था। घटना से दो वर्ष पहले, सुमन ने परेशान होकर घर चलाने के लिए मजदूरी का काम करने लगी। पवन के तानों से परेशान होकर सुमन ने 23 मार्च 2016 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अगले ही दिन सुबह करीब छह बजे पवन ने मृतका सुमन के पिता को फोन पर मामले की जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद मृतका सुमन के पिता मौके पर पहुंचे। सुमन के पिता ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए पवन को नामजद किया। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर पवन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। मामले की अंतिम सुनवाई बुधवार को एडीजे थर्ड न्यायाधीश रीता सिंह की अदालत में हुई। अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर पवन को सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। पवन को सजा दिलाने में सुमन के पिता और उसकी बड़ी बेटी दृष्टि(8) की गवाही अहम रही।
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