गाजियाबाद। जो पति-पत्नी चार साल से न केवल अलग-अलग रह रहे थे बल्कि कोर्ट में तलाक का केस भी लड़ रहे थे, उन्होंने अचानक से साथ रहने का फैसला किया है। वह भी तब जबकि दोनों के गिले-शिकवे अपनी जगह ज्यों के त्यों बने हुए हैं। दोनों ने फिर से एक छत के नीचे रहने के लिए राजी होने की वजह बनी है उनकी चार साल की बेटी। युवक का कहना है कि उसने जब बेटी के भविष्य के बारे में सोचा तो फैसला बदलने पर मजबूर हो गया। उसे लगा है कि जब बेटी स्कूल में दूसरे बच्चों के माता-पिता को साथ देखेगी तो उस पर क्या गुजरेगी।
पति-पत्नी मोदीनगर के हैं। दोनों की शादी छह साल पहले हुई थी। उनकी चार साल की बेटी है। शादी के बाद ही कलह होने लगी। पति की शिकायत थी कि पत्नी का झुकाव मायके की तरफ अधिक है, इसलिए ससुराल पर ध्यान कम देती है। दोनों में कई बार झगड़ा हुआ, परिवार के लोगों और रिश्तेदारों ने समझौता कराया लेकिन बात बनने के कुछ दिन बाद फिर से बिगड़ जाती।
नौबत यहां तक आ गई कि पत्नी बेटी को साथ लेकर मायके में रहनी लगी। उसका दाखिला भी पास के स्कूल में करा दिया। वन स्टाॅप सेंटर में पति की शिकायत की। पति ने तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी लगा दी। दोनों ने शादी में मिला एक-दूसरे का सामान भी वापस कर दिया। रिश्ता पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया। तलाक का केस भी फाइनल होने ही वाला था। सुनवाई लगभर पूरी हो चुकी थी।
काउंसलर अंजना चौहान ने बताया कि काउंसिलिंग के दौरान पति को यह अहसास कराया गया कि जब आप दोनों अलग हो जाएंगे तब बेटी का क्या होगा। बेटी जब स्कूल में दूसरे बच्चों के माता-पिता को एक साथ देखेगी तो उस पर क्या गुजरेगी। जब-जब उसको अपने पिता की जरूरत होगी तब-तब वह सिर्फ उनको याद करके रह जाएगी। इसका ऐसा असर हुआ कि दो काउंसिलिंग के बाद पिता ने अपना फैसला बदल लिया। पति का दिल पिघलता देख पत्नी भी साथ आने के लिए राजी हो गई।
पत्नी से शिकायत पर साथ ही रहूंगा
वन स्टाॅप सेंटर की मैनेजर प्रीति मलिक ने बताया कि फॉलोअप के दौरान पति ने फोन पर बताया कि पत्नी के व्यवहार में बहुत बदलाव नहीं आया है। उससे उसकी शिकायत बनी हुई है लेकिन बेटी के लिए वह उसके साथ ही रहेगा। वह पिता के फर्ज को समझता है। इसलिए, पत्नी से शिकायत होने पर भी हर हाल में रिश्ते को निभाएगा।