गाजियाबाद। जिला एमएमजी अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में अर्थिंग आने से मशीन खराब हो गई। इस कारण से हार्माेनल जांच बंद रही। लैब के कर्मचारियों का कहना है कि मशीन की खराबी सही कराने में 15 दिन का समय लग सकता है। हार्मोनल जांच बंद होने पर सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को होगी। यह जांच निजी लैब में 1500 रुपये से दो हजार रुपये में होती है।
सरकारी स्तर पर सिर्फ एमएमजी अस्पताल की पैथॉलोजी लैब में थायराइड, विटामिन (डी-3, बी-3) सहित अन्य हार्मोनल जांच होती है। थायराइड और विटामिन-डी की जांच गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी होती है। महिला अस्पताल से भी गर्भवती महिलाओं को हार्मोनल जांच के लिए एमएमजी अस्पताल भेजा जाता है। अब जांच बंद होने से गर्भवती महिलाओं को निजी लैब पर महंगी दर पर जांच करवानी पड़ रही है।
सरकारी में मशीन खराब होने से नहीं हुई जांच
साहिबाबाद से आई सोनिया ने बताया कि महिला अस्पताल में थायराइड और विटामिन डी की जांच कराने के लिए एमएमजी अस्पताल में भेजा था। वहां पर बताया गया कि मशीन खराब है, अगले सप्ताह पता कर लेना।
नहीं थे रुपये बाद में कराऊंगी जांच
नंदग्राम से एमएमजी अस्पताल में जांच कराने पहुंची अनीता ने बताया कि मशीन खराब होने से जांच नहीं हुई। निजी लैब में जांच फीस 2300 रुपये बताया था। पास में सिर्फ सात सौ रुपये थे। रक्षा बंधन के बाद जांच कराऊंगी।
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि लैब में अर्थिंग की दिक्कत आने से हार्मोनल जांच करने वाली मशीन खराब हो गई है। मशीन की खराबी को एक दो दिन में सही करवा लिया जाएगा। अर्थिंग की परेशानी दूर होने के बाद ही लैब में हार्मोनल जांच दोबारा शुरू होगी।