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Ghaziabad News: मेयर पद के आरक्षण पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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गाजियाबाद। नगर निगम महापौर का पद लगातार दूसरी बार महिला के लिए आरक्षित कर दिए जाने को वैधानिक रूप से गलत बताते हुए इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। नेहरु नगर निवासी अमित मेहरा ने याचिका में कहा है कि नगर निगम नियमावली में मेयर पद लगातार दो बार महिला के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था नहीं है। हाईकोर्ट ने इस पर प्रदेश सरकार से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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याचिका में कहा गया है, पिछला वर्ग आयोग के सर्वे की रिपोर्ट गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 ने पिछड़ा वर्ग आयोग के काम करने के लिए जो गाइडलाइन दी, उस पर काम नहीं किया गया है। सर्वे के आधार पर तय किए गए आरक्षण से पिछड़ों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है।


मेयर पद आरक्षण

वर्ष आरक्षण
1995 अनारक्षित
2000 अनारक्षित
2006 महिला
2012 ओबीसी
2017 महिला
2023 महिला


वार्ड - 17 का मामला भी कोर्ट में

वार्ड-17 ( सेवानगर हिंडन विहार ) के पार्षद पद को इस बार अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इस पर मनोज शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि नियम विरुद्ध तरीके से यह वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित कर दिया गया है। पिछले चुनाव में यह वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। याचिका में प्रदेश सरकार को पक्षकार बनाया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय ने नगर निगम को याचिका की कापी देकर जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने को कहा है।
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जल्द दाखिल करेंगे जवाब

अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट में दायर की गई याचिकाओं पर जवाब तैयार कराया जा रहा है। जल्द ही प्रशासन को इसकी कॉपी भेज दी जाएगी। प्रशासन हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेगा।
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