साहिबाबाद। साहिबाबाद सीट से विधायक सुनील शर्मा को मंगलवार दोपहर 11 बजे तक जरा भी अहसास तक नहीं था कि छह घंटे बाद ही वह प्रदेश के काबीना मंत्री बनने जा रहे हैं। वह राजनगर सेक्टर-10 स्थित अपने आवास में पूजा कर रहे थे। 11 बजकर पांच मिनट का समय था। तभी उनके मोबाइल फोन की घंटी बजी। फोन सीएम योगी के दफ्तर से था। उन्होंने जैसे ही रिसीव किया, उधर से कहा गया, हैलो... शर्मा जी, तुरंत लखनऊ आ जाइए, आपको सीएम साहब ने बुलाया है, आपको डेढ़ बजे तक पहुंचना है।
उस समय पास में ही मौजूद रहीं उनकी पत्नी अंकेश शर्मा ने बताया कि फोन सुनने के बाद उन्होंने कहा कि वह गाजियाबाद में हैं, ढाई घंटे में लखनऊ पहुंचना संभव नहीं है। इस पर उनसे कहा गया कि ठीक है, वह तीन बजे तक पहुंच जाए। बस फिर क्या था। सुनील शर्मा गाड़ी लेकर तुरंत निकल गए दिल्ली एयरपोर्ट के लिए। उन्होंने फ्लाइट पकड़ी और पहुंच गए लखनऊ।
सुनील शर्मा के भाई अजय शर्मा ने बताया कि उन्हें यह तो पहले से ही मालूम था कि मंगलवार को मंत्री मंडल का विस्तार होना है। इस तरह से बुलाए जाने से परिवार के सब लोग समझ गए कि भाई को मंत्री बनाया जा रहा है। शाम को टीवी पर उन्हें शपथ लेते देखा।
रिकाॅर्ड मतों से जीत का
दो साल बाद मिला इनाम
- दो लाख 14 हजार 386 मतों से जीते थे 2022 का चुनाव
गाजियाबाद। मतदाताओं की संख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र साहिबाबाद में सुनील शर्मा ने सबसे ज्यादा वोटों से जीत का रिकाॅर्ड बनाया था। 2022 के चुनाव में उन्होंने सपा उम्मीदवार अमरपाल शर्मा को दो लाख 14 हजार 386 वोटों से हराया था। विधानसभा चुनाव के इतिहास में यह देश की सबसे बड़ी जीत थी। इसके लिए उनका नाम इंडिया बुक आफ रिकाॅर्ड में दर्ज किया गया। माना जा रहा था कि इस रिकाॅर्ड के बदले तोहफे में उन्हें मंत्री पद मिलेगा। यह अब जाकर मिला है, दो साल के इंतजार के बाद। पेशे से वकील और भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य सुनील शर्मा साहिबाबाद विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। इस सीट पर 2012 में एक बार हार का सामना कर चुके हैं। इससे पहले एक बार गाजियाबाद सीट से विधायक रह चुके हैं।
बजरंग दल के कार्यकर्ता
से मंत्री तक का सफर
सुनील शर्मा 90 के दशक में बजरंग दल के कार्यकर्ता थे। बजरंग दल के वार्ड अध्यक्ष बने।
राम मंदिर आंदोलन में सहारनपुर जेल में 23 अक्तूबर 1990 से सात नवंबर 1990 तक बंद रहे।
वर्ष 2001-2002 में भाजपा के महानगर अध्यक्ष बने। कार्यकर्ताओं ने वोट डालकर उन्हें चुना था।
2007 में गाजियाबाद सीट से चुनाव लड़ा। पहली बार विधायक बने।
2012 में साहिबाबाद सीट से चुनाव लड़े। बसपा के अमरपाल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा।
2017 में साहिबाबाद से 1,50,643 वोटों के सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की।
- 2017 में प्रदेश की पंचायती राज समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
2022 में साहिबाबाद सीट से 2,14,835 वोटों से जीत हासिल कर रिकार्ड बनाया