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Ghaziabad News: हिस्ट्रीशीटर अपराधी को गनर दिया, लोनी थाना प्रभारी निलंबित

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लोनी। पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्र ने लोनी थाने के प्रभारी निरीक्षक अनिल राजपूत को शुक्रवार को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई थाने के हिस्ट्रीशीटर अपराधी चाहत राम को सुरक्षाकर्मी (गनर ) दिए जाने पर की गई है। अनिल ने अपनी मर्जी से थाना स्तर से ही गनर दे रखा था। इसकी जानकारी मिलने पर दो महीने पहले पुलिस आयुक्त ने गनर हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद गनर नहीं हटाया गया।
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अनिल राजपूत को इस मनमानी का जवाब देना होगा। पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही गनर को हटा लिया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि निठौरा गांव के निवासी चाहत राम के कई सफेदपोशों से संबंध हैं। इन संबंधों के बल पर ही उसे सुरक्षाकर्मी मिला हुआ था।



पुलिस के नियम के अनुसार, सुरक्षाकर्मी दो ही सूरत में दिया जाता है। एक तो उन लोगों को जिन्हें शासन से सुरक्षा दे रखी है। दूसरा, जिन्हें जान का खतरा हो। इसका निर्णय भी जिला स्तर पर कमेटी करती है। कमेटी की मंजूरी के बाद ही गनर दिया जाता है। इस मामले में नियम को ताख पर रख दिया गया।
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इंस्पेक्टर पर दर्ज हुआ था केस
निलंबित किए गए इंस्पेक्टर अनिल राजपूत की तैनाती लोनी से पहले नोएडा में थी। वहां उन पर कानून के छात्र को पीटने और उससे वसूली करने का आरोप लगा था। इस मामले में उन पर केस भी दर्ज हुआ था। गाजियाबाद आने पर उन्हें लोनी जैसे महत्वपूर्ण थाने का प्रभारी बना दिया गया।





लोनी थाने के चार पूर्व प्रभारी भी फंसे



( दो साल से मिला हुआ था गनर )



हिस्ट्रीशीटर अपराधी को गनर दिए जाने के मामले में लोनी थाने के तीन पूर्व थाना प्रभारी भी फंस गए हैं। चारों के कार्यकाल में चाहत राम के पास गनर रहा। पुलिस रिकाॅर्ड से पता चला है कि उसे गनर 27 मार्च 2022 को दिया गया था। इसके बाद थाना प्रभारी बदलते रहे लेकिन गनर नहीं हटाया गया। दो साल में चार थाना प्रभारी रहे हैं। ये हैं अनिल राजपूत, प्रताप सिंह, रामगोपाल सिंह और अजय चौधरी। हिस्ट्रीशीटर की सुरक्षा में तैनात रहे सिपाही भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। बगैर किसी लिखित आदेश के वे सुरक्षा में रहे।



आठ केस दर्ज हैं हिस्ट्रीशीटर पर



( दो साल पहले बंद हुई निगरानी )



हिस्ट्रीशीटर चाहत राम पर आठ केस दर्ज हैं। ये सभी 2007 से 2009 के बीच दर्ज हुए। 2009 के बाद का कोई केस नहीं है। 2009 में ही उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। लंबे समय तक नया केस दर्ज न होने की वजह से 2022 में उसकी निगरानी बंद कर दी गई। इसी साल उसे गनर दे दिया गया। जांच में यह भी मालूम किया जाएगा कि पहली बार गनर कैसे मिला।



एसएचओ के निलंबन की कार्रवाई के बाद एसीपी लोनी सूर्यबली मौर्या के नेतृत्व में जांच टीम का गठन किया गया है। इस टीम की रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी
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- विवेक यादव, डीसीपी ग्रामीण
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