बुगरासी। पिछले छह माह से चुनाव की तैयारी कर रहे कई प्रत्याशियों के मनसूबों पर आरक्षण निर्धारित होते ही पानी फिर गया है। अब मैदान से हटे ऐसे प्रत्याशियों का व्यवहार भी बदल गया है। अब तक सेवा में लगे प्रत्याशी अब चुनाव नहीं लड़ने की आस में बात करने से भी बच रहे हैं।
छह माह पहले पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे काफी प्रत्याशियों के मंसूबो पर पानी फिरा है। जैसे ही आरक्षण निर्धारित हुआ तभी तैयारी कर रहे काफी प्रत्याशियों को मैदान छोड़ना पड़ा है। ऐसे प्रत्याशी जन सेवा में लगने के साथ ग्रामीणों के सारे काम करने में लगे थे। गांव से संबंधित काम हो या फिर बाहर शहर से जुड़ा काम रहा हो, सभी मैदान में आए संभावित प्रत्याशी सेवा के लिए तत्पर नजर आ रहे थे। अब आरक्षण की लिस्ट जारी हुई तो काफी प्रत्याशियों ने सेवा जैसे शब्द से ही मुंह मोड़ लिया है। अब ऐसे लोगों का व्यवहार भी बदल गया है। ग्रमीणों की मानें तो सेवा को तत्पर रहने वाले लोग अब चुनाव में खड़ा नहीं होने के कारण सीधे मुंह बात तक नहीं कर रहे। आलम यह है कि बाहर की बात तो दूर गांव स्तर पर किसी भी समस्या में साथ देने तक को तैयार नहीं हैं। लोगों की आर्थिक मदद करने वालों ने अपनी उधारी के भी तकादे सख्त करने शुरू कर दिए हैं। वहीं आरक्षण निर्धारित होने पर मैदान में सभी प्रत्याशियों ने लोगों के बीच अपनी पैठ जमानी शुरू कर दी है। जातिगत आंकड़ों से लेकर जीत के लिए हर कार्ड खेला जा रहा है। देर रात तक लोगों से मिलने का दौर जारी है। गांव में स्थान-स्थान पर समूह के रूप में खड़े लोगों में अब सिर्फ चुनाव को लेकर ही चर्चा चलती रहती है। अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए दूसरे प्रत्याशी से समझौते तक पर लोग काम कर रहे हैं।