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ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर भाकियू भानु ने किया कलक्ट्रेट का घेराव

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फ़ोटो सहित  ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर भाकियू भानु ने किया कलक्ट्रेट का घेराव - चार घंटे तक डीएम से मिलने को लेकर अड़े रहे किसान, जिला प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद माने - गेल पाइपलाइन व डीएमई से प्रभावित किसान उचित मुआवजा की कर रहे मांग - मुआवजा व दूसरी मांगों को लेजर मंगलवार को होगी बातचीत, नहीं मानने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी संवाद न्यूज एजेंसी गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन भानु के नेतृत्व में  बृहस्पतिवार को गेल इंडिया गैस पाइपलाइन व  दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसानों ने कलक्ट्रेट का घेराव कर जमकर नारेबाजी की। ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर पहुंचे किसान डीएम से बातचीत को लेकर चार घंटे तक अड़े रहे। बाद में जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को मुआवजा सहित दूसरी मांगों पर बातचीत का लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने धरना खत्म किया।  गेल इंडिया गैस पाइपलाइन को लेकर पूठी, रघुनाथपुर, इकला, इनायतपुर, छिड़ौली, हसनपुर पीपलखेड़ा व दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे में उचित मुआवजा न मिलने को लेकर कई दिन से विरोध कर रहे किसान बृहस्पतिवार को भारी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। किसानों के कलेक्ट्रेट पहुंचने को लेकर पहले से ही भारी तादाद में मौजूद पुलिसकर्मियों ने कलक्ट्रेट गेट पर बैरीकेडिंग लगाकर किसानों को अंदर जाने से रोका। किसान जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन को लेकर अंदर जाने की मांग करते रहे। लगभग एक घंटे तक कलक्ट्रेट गेट पर डटे रहे। मौके पर पहुंचे  एसडीएम व  एडीएम सिटी ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। किसानों ने उनसे बातचीत करने और ज्ञापन देने से मना कर दिया। किसान जिलाधिकारी को बातचीत के लिए बुलाने की मांग करते रहे। इस दौरान किसानों की अधिकारियों के साथ नोकझोंक भी हुई। किसान काफी देर तक गेट पर ही नारेबाजी करते रहे। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसान कलेक्ट्रेट परिसर स्थित धरना स्थल पर बैठ गए।  किसान दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे  से प्रभावित आकाशनगर निवासियों के  मुआवजे का निर्धारण आबादी सर्किल रेट पर  करने,  धोके से प्लाट बेचने वाले कॉलोनाइजर से मुआवजा दिलाने या कानूनी कार्रवाई करने  और एक्सप्रेस वे निर्माण के चलते क्षतिग्रस्त रास्तों व सर्विस रोड बनवाने की मांग कर रहे हैं। वहीं गेल इंडिया गैस पाइपलाइन प्रबंधन द्वारा शुरू में मना करने के बाद अब खसरा खतौनी में अपना नाम दर्ज कर लिया गया है। इससे जमीन की खरीद-परोख्त बन्द हो गई है। यह वापस किसानों के नाम हो। साथ ही गेल इंडिया ने लिखित समझौते के बावजूद आज तक संबंधित गांव में सीएसआर फंड के तहत कोई विकास कार्य नहीं करवाया है।  कंपनी प्रबंधन ने क्षतिपूर्ति का समान मुआवजा देने की बात की थी लेकिन अब अलग-अलग मुआवजा दे रहा है। मौखिक तौर पर कंपनी ने प्रभावित किसानों के परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी देने की भी बात की थी। यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव मनोज नागर ने कहा कि हमारी मांग है कि जिला प्रशासन हम किसानों को उनका हक दिलाएं। अगर हमारी मांगे समय रहते नहीं मानी गई तो किसान बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इस मौके पर मनीष नागर, बॉबी त्यागी, प्रदीप, आनंद वर्मा, दीपक शर्मा, विपिन शर्मा, पन्ना यादव, अजय पाल, कमल प्रसाद पांडे, कल्लू यादव, जितेंद्र शर्मा, प्रेमवीर, सत्यपाल यादव आदि मौजूद रहे।  --- परिचर्चा, 1.  कई महीनों से हम लोग प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कोई हमारी बात नहीं सुन रहा। इसलिए आज सब लोग मजबूर होकर डीएम से मिलने आए हैं।-- रजनी शर्मा 2.  कई बार अधिकारी धरना स्थल पर आए।  हर बार मांग पूरी करने की बात कहते हैं लेकिन आज तक एक भी बात नहीं मानी गई।  कंपनी अपनी मनमानी कर रही है। -- माया जोशी  ---- प्रशासन का वर्जन
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