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मौसम का बदला मिजाज, लापरवाही कर देगी बीमार

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मौसम का बदला मिजाज, लापरवाही कर देगी बीमार - रहिए सतर्क, सेहत पर वार करेगा मौसम -थोड़ी सी लापरवाही हो सकती है जानलेवा माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। रात में बूंदाबादी होने के बाद मौसम के मिजाज में बदलाव आ गया है। ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के अलावा उन्हें ज्यादा परेशानी होगी, जो सांस के मरीज हैं अथवा कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और जल्द ही संक्रमण मुक्त हुए हैं। बूंदाबादी होने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। शनिवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री दर्ज किया जबकि न्यूनतम तापमान नौ डिग्री रिकार्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में सर्दी बढ़ेगी। इसलिए बेहतर होगा कि किसी बीमारी की चपेट में आने बचने के लिए सर्दी और प्रदूषण से बचाव करें। सांस के मरीजों के लिए बढ़ जाती है परेशानी  आईएमए के अध्यक्ष एवं पल्मोनोलॉजिस्ट डा. आशीष अग्रवाल का कहना है कि सर्दियों का मौसम सांस के मरीजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सांस संबंधी दिक्कतें जैसे दमा, फ्लू और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है। इस वजह से लोगों की आंखों में जलन, नाक में खुजली, गले में खरास और खासी जैसे लक्षण सामान्य तौर पर देखने को मिलते हैं। सर्दी बढ़ने के साथ ही सांस की नली की संवेदनशीलता तुलनात्मक रूप से बढ़ जाती है, जिससे वह सिकुड़ जाती है। बुजुर्गो में सांस संबंधी समस्याएं कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं। दरअसल बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है जिससे खतरा बढ़ जाता है। डा. आशीष का कहना है कि सर्दी शुरू होते ही ओपीडी में सांस दमा आदि रोगियों की संख्या बढ़ने लगती है। पुरानी चोट या हड्डी में भी होती है दिक्कत हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं उपमुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. डीएम सक्सेना का कहना है कि सर्दी के मौसम में जोड़ों का दर्द भी बढ़ जाता है। सीढ़ियां चढ़ने या उठने-बैठने में परेशानी होने लगती है। कुछ देर के लिए एक ही मुद्रा में रहने पर मांस पेशियों में अकड़न या दर्द अथवा थोड़ा-सा अधिक दबाव पड़ने पर जोड़ों के हिस्सों में सूजन आना, जोड़ों से आवाज आना कुछ ऐसे लक्षण हैं, जो वृद्धों के साथ-साथ अब युवाओं में भी दिखने लगे हैं। बदलती जीवनशैली, व्यायाम की कमी, उचित खान-पान का अभाव व अत्यधिक काम का दबाव युवाओं को भी अर्थराइटिस का शिकार बना रहा है। ऐसे में जोड़ों की समस्या से प्रभावित लोगों के लिए एक बार फिर सर्दियों का वही समय आ गया है, जो उनकी तकलीफ को बढ़ा देता है। लोग सर्दियों में ज्यादा खाना खाते हैं व ठंड के कारण सुबह की सैर को कम निकलते हैं। ज्यादा समय रजाई में रहते हैं, इसलिए धूप कम ले पाते हैं। सर्दी में ऐसे मरीजों की संख्या में 25 फीसदी का इजाफा होता है। मरीजों को ठंड से बचना चाहिए। कैसे करें बचाव - मौसमी सब्जियां और फल खाएं। - ताजी कटी हुई सलाद का प्रयोग करें। - सांस के रोगी खासकर दमा के मरीज सर्दी में नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें। - डॉक्टर की सलाह से अपने इंहेलर की डोज भी दुरुस्त कर लें। - हर हाल में ठंड से अपना बचाव करें। - गुनगुने पानी से नहाएं। - अगर सांस की परेशानी है तो सुबह सैर के लिए न जाएं - रोगियों को अलाव के धुएं से बचना चाहिए, अन्यथा इससे उन्हें सास का दौरा पड़ सकता है। - गठिया होने पर चिकित्सक से सलाह लें। इसके लिए एक्सरसाइज की जरूरत भी पड़ती है। - ठंड से जितना हो सके बचें। - पूजा आदि कार्यक्रमों में ज्यादा देर तक एक ही मुद्रा में न बैठें। - ऐसी चीज न खाएं जिससे वजन बढ़े। --------- आशुतोष यादव
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