मच्छर एवं प्रदूषण से लोग हो रहे बीमार
- टायफाइड एवं डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ी
- जिले में सैकड़ों डेंगू मरीज, 28 की पुष्टि
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। इस बार नवंबर के महीने में भी लोग वायरल बुखार, डेंगू व टायफाइड की चपेट में आ रहे हैं। जबकि इसके पहले अक्टूबर के बाद वायरल व बुखार के मरीजों की संख्या में कमी आ जाती थी। संक्रमण की चपेट में आने वाले अधिकांश मरीजों को डाक्टर भी कोरोना की जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ रही है, लेकिन उनमें टायफाइड या डेंगू की पुष्टि हो रही है। अब तक सैकड़ों लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन विभागीय आंकड़ा सिफ्र 28 पर ही रुका है। मलेरिया अधिकारी के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से आंकड़ा भी अपडेट नहीं किया जा रहा है।
आईएमए अध्यक्ष डा. आशीष अग्रवाल का कहना है कि इस तरह के मौसम में जिसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें अधिक परेशानी होती है। जो स्वस्थ हैं उन्हें भी सावधानी की जरूरत है। किसी भी तरह के बुखार की चपेट में आने पर स्नायु तंत्र पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए बुखार की चपेट में आने पर स्वतः दवाई न लें, क्योंकि हर बुखार में एंटी बायोटिक की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन अधिकांश लोग मेडिकल स्टोर से दवाई खरीद कर ले लेते हैं जो बाद में शरीर के लिए हानिकारक होती है।
वायरल बुखार होने के कारण
आम तौर पर वायरल फीवर मौसम के बदलने पर प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने पर होता है, लेकिन इसके सिवा और भी कारण होते है जिनके कारण बुखार आता है। दूषित जल एवं भोजन का सेवन, प्रदूषण के कारण दूषित वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों का शरीर के भीतर जाना, रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी, वायरल बुखार हुए रोगी के साथ रहना होता है।
लक्षण
थकावट, खांसी, संक्रामक जुकाम, उल्टी, दस्त जैसे लक्षण देखने को मिलते है और तापमान अधिक होने के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। थकान, पूरे शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान बढ़ना, खांसी जोड़ो में दर्द, दस्त, त्वचा के ऊपर रैशेज होना, सर्दी लगना, गले में दर्द, सिर दर्द, आंखों में लाली तथा जलन रहना। उल्टी और दस्त का होना। वायरल बुखार ठीक होने में 5-6 दिन भी लग जाते है। शुरूआती दिनों में गले में दर्द, थकान, खांसी जैसी समस्या होती
वायरल फीवर से बचाव के उपाय
कुछ सावधानियां बरतने पर यानि जीवनशैली में और खान-पान में बदलाव करके वायरल से बचाव कर सकते हैं।
- खाने में उबली हुई सब्जियां, हरी सब्जियां खाना चाहिए।
- दूषित पानी एवं बासी भोजन से बचें।
- पानी को उबाल कर थोड़ा गुनगुना ही पिएं।
- वायरल बुखार से ग्रस्त रोगी के संपर्क में आने से बचें।
- मौसम में बदलाव के समय उचित आहार-विहार का पालन करें।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए आयुर्वेदिक उपचार एवं अच्छी जीवन शैली को अपनाएं।
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घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग जरूर करें, इससे कोरोना संक्रमण और प्रदूषण दोनों से बचाव होगा। बुखार होने पर हैवी डोज की दवाइयां या एंटीबायोटिक लेने से बचना चाहिए। आराम करने के साथ ही लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। खाने-पीने में विशेष सावधानी बरतें। तीन से पांच दिन में बुखार समाप्त हो जाता है। तीन दिन से अधिक बुखार हो तो जांच अवश्य करानी चाहिए।
डा. अलका यादव, जिला एमएमजी अस्पताल
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आशुतोष यादव