- गंगा की तलहटी तक थी जिले की सीमा, 2011 में हापुड़ जिला बनने पर सिमटा क्षेत्र
- एशिया की सबसे बड़ी फोरेंसिक लैब और यूपी-112 का ओएमसी यहां के मजबूत स्तंभ
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। पुलिसिंग के नजरिये से गाजियाबाद की बात करें तो पहले इसकी सीमा गंगा की तलहटी तक लगती थी। साथ ही गौतमबुद्धनगर में शामिल हुआ दादरी थाना भी गाजियाबाद का ही हिस्सा था। वक्त बदला तो जिला पुलिस की सीमाएं सिकुड़ती चली गईं। 2011 में हापुड़ अलग जिला बना तो पिलखुवा से लेकर गढ़मुक्तेश्वर तक का हिस्सा जिले से कट गया। इसके बाद गाजियाबाद जिले में महज 17 थाने रह गए। लेकिन, धीरे-धीरे गाजियाबाद पुलिस हाईटेक हुई और वर्तमान में यह तकनीकी विज्ञान का केंद्र भी बन गया।.................
वर्तमान की बात करें तो साढ़े 4 हजार से अधिक पुलिसकर्मी जिले की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। अभी तक जिले में कप्तान के अलावा मुख्यत: एसपी सिटी, एसपी ट्रैफिक, एसपी ग्रामीण व एसपी ग्रामीण का पद सृजित था। लेकिन हाल ही में प्रदेश शासन ने जिले में एएसपी के दो नए पद सृजित कर हिंडन पार बसे कंकरीट के शहर (टीएचए) को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम उठाया तो वहीं, प्रोटोकॉल व अन्य समन्वय संभालने के लिए जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया। वर्तमान एसएसपी कलानिधि नैथानी ने अपने 10 साल के कार्यकाल में जिले को टीला मोड़, कौशांबी व मधुबन बापूधाम के रूप में तीन थाने दिए। जिसके बाद जिले में थानों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। 21वें थाने के रूप में नंदग्राम को स्थापित करने की प्रक्रिया भी युद्धस्तर पर चल रही है।
एशिया की सबसे बड़ी फोरेंसिक लैब गाजियाबाद के पास.................
फोरेंसिक लैब से जुड़े मसलों के के लिए मेरठ जोन की पुलिस के पास लखनऊ और बंगलुरू फोरेंसिक लैब का सहारा था। वर्ष 2018 में गाजियाबाद को एशिया की सबसे बड़ी फोरेंसिक लैब मिली तो गाजियाबाद देशभर में तकनीकी विज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित हो गया। मोदीनगर तहसील के निवाड़ी थानाक्षेत्र में करीब 64 करोड़ रुपये की लागत से बनी फोरेंसिक लैब जिले की बड़ी उपलब्धियों में से एक है।
प्रदेश के तीन ओएमसी में से एक गाजियाबाद में..…...........
यूपी-112 सेवा को ऑपरेट करने के लिए प्रदेश में तीन स्थानों पर ओएमसी (ऑपरेशनल मिरर सेंटर) स्थापित किए गए। इनमें से लखनऊ और कानपुर के बाद तीसरा ऑपरेशनल मिरर सेंटर गाजियाबाद में है। अधिकारियों के मुताबिक यूपी-112 पर आने वाली कॉल्स में 15 से 20 फीसदी कॉल्स गाजियाबाद में रिसीव होती हैं। यहां से संबंधित क्षेत्रों को कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश दिए जाते हैं।
पीएसी की दो वाहिनी देती हैं मजबूती................
आपात स्थिति से निपटने और पुलिस को मजबूती प्रदान करने के लिए गाजियाबाद में पीएसी की दो बटालियन मौजूद हैं। 41वीं वाहिनी पीएसी वैशाली के सेक्टर-1 में स्थित है तो 74वीं वाहिनी पीएसी गोविंदपुरम में है। दोनों ही स्थानों पर तैनात हजारों जवान न सिर्फ गाजियाबाद, बल्कि प्रदेशभर के संवेदनशील घटनाओं में अपना प्रदर्शन देते हैं। मेरठ जैसे बड़े जिले की तर्ज पर गाजियाबाद में भी पीएसी की दो वाहिनी होना अपने आप में गौरवपूर्ण बात है।
कमिश्नरेट सिस्टम की दौड़ में गाजियाबाद..................
दिल्ली से नजदीकी और हॉट सिटी होने के कारण गाजियाबाद प्रदेश में अहम स्थान रखता है। गाजियाबाद को यूपी का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद गाजियाबाद भी अब कमिश्नरेट सिस्टम की दौड़ में है। बीते दिनों दूसरे चरण में कानपुर और गाजियाबाद में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने की चर्चा चली थी। यह चर्चा कभी भी मूर्त रूप ले सकती है। जिसके बाद पुलिस के पास काफी हद तक प्रशासनिक अधिकार भी आ जाएंगे।