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वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए बने ई वेस्ट कलेक्शन सेंटर

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माइ सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए आरडब्लूए फेडरेशन गाज़ियाबाद की प्रशासनिक समिति द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया गया । रविवार को आयोजित इस वेबिनार में वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर चर्चा हुई | वेबिनार में मुकेश अग्रवाल ने कहा हिंडन श्मशान घाट पर औसतन प्रतिदिन 30 से अधिक चिताएं जलती है। यदि यहाँ मोक्षदा प्रणाली का इस्तेमाल किया जाये तो दो तरफ से खुलने वाले लोहे के बॉक्स में एक चिमनी लगी होने के कारण एक तिहाई लकड़ी में शमन पूरा हो जाता है | अर्थात दो तिहाई पेड़ बच जाता है । दोनों फेडरेशन के चेयरमैन कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने कहा भारत में प्रति वर्ष करीब 20 लाख मैट्रिक टन ई वेस्ट पैदा होता है | इसका 10 प्रतिशत औपचारिक रिसाइकलिंग सेंटर्स पर जमा होता है और 90 प्रतिशत अनौपचारिक तरीके से निस्तारित किया जाता है ।इससे वातावरण में लैंड,कैडमियम,मरकरी मिल जाते हैं । इस कारण भूगर्भ जल भी प्रदूषित होता है और हवा भी। कर्नल त्यागी ने बताया की अधिकतर लोग ई वेस्ट को इस लालच में जला देते हैं की उसमे से कुछ महंगी धातुएं जैसे गोल्ड और टंगस्टन मिल जाएँ | ई वेस्ट को जलाने से वाहनों के बराबर ही प्रदूषण होता है | यही कारण है की मुरादाबाद का प्रदूषण , गाज़ियाबाद के प्रदूषण से भी एक अंक ज्यादा रहा था। क्योंकि वहां राम गंगा के किनारे ई वेस्ट को चोरी छुपे बेतरतीब तोडा गया , जलाया गया। यदि गाज़ियाबाद में ई वेस्ट कलेक्शन सेन्टर स्थापित कर दिए गये होते तो लोनी में किसानो का ई वेस्ट जलाने के विरुद्ध जबरदस्त आन्दोलन न होता ।इस अवसर पर लाइन पार आर डब्लू ऐ फेडरेशन के अध्यक्ष आर के आर्य , डा मंजू सिंह , डा विनीत अग्रवाल ने कहा की शहर में तीस हजार से अधिक जुगाड़ चल रहे हैं। इन पर भी अगर तीन महीने के लिए पाबन्दी लगा दी जाये तो प्रदूषण का स्तर तुरंत कम होने लगेगा । मेजर सुशील गोयल , चेतना सेनी , सुश्री स्वाति बंसल , गोपाल महेश्वरी एवं अन्य सभी उपस्थित सदस्यों ने कहा की प्रदूषण को न रोक पाने में प्रशासन पूरी तरह असफल रहा है | अब पुरानी नीतियों को बदला जाना चाहिए और सम्बंधित अधिकारी को प्रदूषण न रोक पाने के लिए दण्डित किया जाना चाहिए |
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