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कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट हुआ 93 7 फीसदी

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कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट हुआ 93 फीसदी - सितंबर में रिकवरी रेट था 82.19 फीसदी माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोरोना संक्रमित मरीजों का रिकवरी रेट बढ़ने के साथ ही संक्रमितों की संख्या भी कम होने लगी है। पिछले एक महीने में रिकवरी रेट सवा दस गुना बढ़ गया है। सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में अब तक संक्रमणता दर में 3.52 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, मरीजों के संक्रमण मुक्त होने का प्रतिशत भी लगभग 10.25 फीसदी बढ़ा है। इसके साथ ही मृत्युदर में भी 0 .14 की गिरावट आई है।  जिले में पिछले महीने 81237 लोगों की जांच की गई थीं, इनमें से 4666 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसमें संक्रमणता प्रतिशत 5.99  था। जबकि अक्टूबर में 28 तारीख तक जिले में 117815 लोगों की जांच की गईं, इनमें से 3695 लोग संक्रमित पाए गए। इनका प्रतिशत 3.47 रहा, जो पिछले महीने के मुकाबले 2.52 प्रतिशत कम है। इसी अवधी में पिछले महीने जिले में कोरोना मरीजों के संक्रमण मुक्त होने का प्रतिशत 82.19 था, जो अक्टूबर में बढ़कर 93.7 हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिकवरी रेट में सुधार और पॉजिटिव रेट में कमी आने से जिले में कोरोना संक्रमण कम होता जा रहा है। यदि सबकुछ ठीक रहा और पॉजिटिव रेट व रिकवरी का यही प्रतिशत भी बना रहा तो अगले दो से तीन महीनों में जिला संक्रमण की न्यूतम दर पर पहुंच जाएगा। हालांकि इस त्योहारी सीजन में लोगों की लापरवाही से एक बार फिर संक्रमण बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। 12 दिनों में कम हुई जांच जिले में12 दिन से कम कर दी गई है। लखनऊ स्तर से निर्देश हैं कि एक दिन में दो हजार एंटीजन और 1500 जांच आरटीपीसीआर की जाए।  अपर स्वास्थ्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेसिंग में पूछा था कि शासन स्तर से जिले में प्रतिदिन दो हजार एंटीजन जांच के निर्देश दिए गए हैं, फिर 3500 जांच क्यों की जा रही थीं। अक्टूबर के शुरु में जिले को 60 हजार एंटीजन किट एक महीने की जांच के लिए मुहैया करवाई गई थीं, जो ज्यादा जांच के चलते समय से पहले खत्म हो गईं। उन्होंने जिले में प्रतिदिन 2000 एंटीजन और 1100 आरटी-पीसीआर जांच के निर्देश दिए हैं। पिछले पांच दिन से कम हुई संक्रमित मरीजों की संख्या पिछले पांच दिन से संक्रमण की चपेट में आए मरीजों की संख्या कम हुई है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 85 से लेकर 150 तक मरीज आ रहे हैं। इसका दो कारण है कि एक तो जांच कम हुई है, दूसरी संक्रमणता दर कम हुइ है। हालांकि अधिकारियों ने अंदेशा जताया है कि अभी एक बार संक्रमण बढ़ सकता है। ---------- आशुतोष यादव
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