दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर दिन की जगह रात में निर्माण कार्य पकड़ रहा रफ्तार, लाल कुआं के पास बंद पड़ा काम
- फोटो : Amar Ujala
सबहेडः ग्रैप के नियमों का धरातल पर दिख रहा मिलाजुला असर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर दिन की जगह रात को रफ्तार पकड़ रहा काम
- लगातार बढ़ रहा प्रदूषण, विभिन्न प्रोजेक्ट पर धीमा हुआ निर्माण कार्य
- ठेकेदारों को साफ हिदायत, सभी मानक पूरे करते हुए करें निर्माण कार्य
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। बढ़ते प्रदूषण के स्तर के चलते विकास कार्यों की रफ्तार थम सकती है। अक्टूबर माह की शुरुआत से ही महानगर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खतरे के निशान से ऊपर चल रहा है। गाजियाबाद सहित एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू हुए करीब दो सप्ताह बीत चुका है। लेकिन ग्रैप के नियमों का धरातल पर मिलाजुला असर दिखाई दे रहा है।ग्रैप के नियमों का ही असर है कि अधिकांश साइटों पर निर्माण कार्य रात में चल रहा है। इसके बावजूद मंगलवार को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर धूल का गुबार उड़ता हुआ दिखाई दिया।
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर रात में तेजी से चल रहा काम:
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के काम पर साफ असर दिखाई दे रहा है। एनएचएआई की ओर से ग्रैप के नियमों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। दिन में वाहनों का भारी दबाव होने के चलते एनएचएआई की ओर से अब निर्माण कार्य को रात में रफ्तार दी जा रही है। इसी के चलते मंगलवार दिन में लालकुआं, एबीईएस कट के पास काम थमा हुआ दिखाई दिया। एनएचएआई की ओर से हाईवे पर निर्माण साइट के आसपास पानी का छिड़काव किया गया। इसके बावजूद लाल कुआं और प्रताप विहार की ओर धूल का गुबार उड़ता हुआ नजर आया।
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ठेकेदारों को कड़ी हिदायत, ग्रैप नियमों का असरः
महानगर में जीडीए की ओर से बुनकर मार्ट, प्रधानमंत्री आवास, हिंडन पुल सहित कई निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। जीडीए की ओर से निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों और सरकारी एजेंसियों को ग्रैप के नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी का असर है कि निर्माण कार्य की रफ्तार पर असर पड़ा है। निर्माण कार्य की साइटों पर दिन में दो से तीन बार टैंकरों से पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
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लगातार बढ़ रहा एक्यूआई लेवल लगातार, बढ़ रही चिंताः
महानगर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का लेवल लगातार बढ़ता जा रहा है।जीडीए, नगर निगम सहित पूरी सरकारी मशीनरी की ओर से ग्रैप के नियमों को कड़ाई से लागू करने की बात की जा रही है। लेकिन उसके नतीजे धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसमें धूल उड़ने से रोकने के लिए टैंकों के जरिए पानी का छिड़काव बेहद जरूरी है। खासकर बड़ी निर्माण साइटों पर एंटी स्मॉग गन लगाए जाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन कुछ को छोड़ अधिकांश बिल्डरों ने अपनी साइटों पर एंटी स्मोक गन नहीं लगाई है। यहां तक कि अक्टूबर माह बीतने को है, जीडीए अब तक चार एंटी स्मॉग गन की खरीद नहीं कर पाया है। ऐसे में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन सड़कों की सफाई, रात में सड़कों की धुलाई, कंस्ट्रक्शन साइट पर निर्माण सामग्री को ढककर रखने, प्रतिबंधित ईंधन के प्रयोग पर रोक, बड़े जेनरेटर का मानकों के तहत संचालन, पीएनजी-सीएनजी का इस्तेमाल सहित कई अन्य नियम का कड़ाई से लागू होना जरूरी है.
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