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गांव की मोहल्ला क्लास से सुधरेगा बच्चों का भविष्य

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राहुल सक्सेना गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण ने गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चौपट कर दिया। सरकार ने भले ही परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करा दी हों, लेकिन 80 से 90 प्रतिशत बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि अधिकतर बच्चों के पास संसाधनों का अभाव है। न तो बच्चों के पास एंड्रायड मोबाइल की व्यवस्था है और न ही इंटरनेट। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ शिक्षकों ने मोहल्ला क्लास चलाने की पहल की है। इसमें गांव के शिक्षित लोग शिक्षकों की मदद से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। काफी संख्या में बच्चे इसका लाभ भी ले रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय में शिक्षा की स्थिति को सुधारने के लिए परिषदीय स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं अपने स्तर से पहल कर रहे हैं। अजबपुर मंगावली के प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका सुमन ने गांव में मोहल्ला कक्षाएं चलवाना शुरू कर दिया है। गांव में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों के पास मोबाइल नहीं हैं और न ही इंटरनेट की व्यवस्था है। उनका कहना है कि लॉकडाउन में तो अभिभावक घर पर रहते थे, तो बच्चे किसी न किसी कि मोबाइल का प्रयोग कर लेते थे। अब सभी अभिभावक भी नौकरी पर चले जाते हैं, ऐसे में बच्चों के सामने पढ़ाई की और बड़ी समस्या खड़ी हो गई। उन्होंने बताया कि गांव के कुछ शिक्षित लोगों को एकत्रित किया, जो उनसे लगाव रखते थे। उनसे अपील की है कि गांव के बच्चों को पढ़ाने में मदद करें। इसमें गांव की काफी लड़कियों ने मदद का आश्वासन दिया और मोहल्ला क्लास चलाना शुरू करा दिया। - बच्चों का बनाया कक्षावार ग्रुप परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का कक्षावार ग्रुप बनाया है। एक कक्षा के एक मोहल्ले में 10-10 बच्चों को शामिल किया गया है। बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। प्रत्येक दिन बच्चे मोहल्ले में एक घर में एकत्रित होते हैं और एक से दो घंटे पढ़ाई करने के बाद घर वापस चले जाते हैं। - बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर पढ़ाई के साथ-साथ मोहल्ला क्लास में छात्र-छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने का भी काम किया जा रहा है। गांव की जो शिक्षित लड़कियां हैं, वह बच्चों को सिलाई कढ़ाई के बारे में भी सिखा रहे हैं। छात्राओं के साथ छात्र भी इसमें बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि छात्राएं पढ़ाई के साथ अपने हाथ का काम भी सीख जाएं, जिससे भविष्य में उनके सामने किसी प्रकार की दिक्कत खड़ी न हो। लॉकडाउन में बच्चों के लिए 15 दिन का विशेष कैंप भी चलाया गया। - वीडियो के माध्यम से आसान हो रही है पढ़ाई अजबपुर मंगावली की शिक्षिका सुमन ने बताया कि वह प्रत्येक दिन पढ़ाई की वीडियो बनाकर संबंधित मोहल्ला क्लास की हेड को भेजती हैं, वह उस वीडियो के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का काम करती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई काफी आसान हो जाती है। बच्चे आसानी से विषय के बारे में समझ जाते हैं। वही वीडियो बच्चों को भेजी जाती हैं, जो आनॅलाइन कक्षाओं में अन्य बच्चों को भेजते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए रीड एलोंग एप भी डाउन लोड करा रखा है, जिससे किसी प्रकार की बच्चों को समस्या न हो। -- वर्जन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए मैंने गांव के शिक्षिक युवक और युवतियों से संपर्क किया। सभी को अपनी पहल और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए कुछ करने के बारे में समझाया। सभी ने सहयोग किया और पढ़ाने में रुचि दिखाई। काफी संख्या में बच्चे मोहल्ला क्लास में पढ़ाई कर रहे हैं। इसका रिजल्ट भी अच्छा आ रहा है। सुमन, सहायक अध्यापिका अजबपुर मंगावली --- मोहल्ला क्लास के बारे में जानकारी हुई है। यह अच्छी पहल है। शिक्षिका की इस पहल को अन्य गांव में भी लागू कराने का प्रयास करेंगे। गांव के शिक्षित लोगों के माध्यम से बच्चों का पढ़ाया जा सकता है। शिक्षक अपना योगदान दे ही रहे हैं। जब तक स्कूल नहीं खुलते हैं। तब तक यह पहल काफी सराहनीय रहेगी। ब्रजभूषण चौधरी, बीएसए
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