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माता रानी की मूर्तियों से बंधी आस, सुधरेंगे आर्थिक हालात
- जीटी रोड किनारे मूर्ति बनाने वाले लोग सकारात्मक सोच रख बना रहे मूर्तियां
- जीटी रोड पर करीब 46 परिवार रहते हैं जो मूर्ति बनाने का करते हैं काम
- गणेश चतुर्थी के बाद अब यह है दूसरा त्योहार जिससे बंधी उम्मीदें
माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। कोरोना काल के दौरान शुरू हुए अब त्योहारी सीजन से बहुत से लोगों की उम्मीदें जग गई हैं। बड़े व्यापारी और बाजार जहां आने वाले त्योहारी सीजन की तैयारी कर रहे हैं वहीं अब सड़क किनारे मूर्ति बनाने वाले कलाकारों को भी इन त्योहारों से उम्मीदें बंध गई हैं। गणेश चतुर्थी के बाद नवरात्र दूसरा मौका है जब इन मूर्तिकारों के लिए आमदनी का जरिया बना है। बुकिंग हो न हो यह लोग लगातार अपनी कलाकृति तैयार कर रहे हैं और माता रानी की मूर्ति से सकारात्मक आस बांधी हुई है।
शहर में अलग-अलग जगहों पर सड़कों पर कारीगर दुर्गा पूजा की तैयारी में जुट गए हैं। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास जीटी रोड पर करीब 46 परिवार रहते हैं जिनकी आमदनी का जरिए इन मूर्तियों से जुड़ा हुआ है। यह लोग इन दिनों अपनी कला से माता का रूप संवारने में जुटे हुए हैं। मूर्ति बनाने वाले रोहित का कहना है कि हालांकि हमारे काम की बोहनी गणेश चतुर्थी से शुरू हो चुकी है लेकिन उस समय आमदनी बहुत अधिक नहीं रही। ऐसे में इस बार वह लोग माता रानी की भी मूर्तियां बहुत अधिक संख्या में और बहुत बड़ी व बड़े लागत से नहीं बना रहे। रोहित का कहना है कि अभी तक ग्राहकों का कुछ पता नहीं है फिर भी यह उम्मीद जरूर है कि लोग घरों में भी माता रानी की मूर्ति स्थापित जरूर करेंगे। ऐसे में घर के मुताबिक ही माता रानी की मूर्तियां छोटी व मझौले आकार की तैयार की जा रही है। हालांकि उम्मीद है कि गणेश चतुर्थी के मुकाबले दुर्गा पूजा में मूर्तियां अधिक बिकेंगी।
वहीं सत्यवान का कहना है कि इस बार सभी लोगों ने पिछले वर्षों के मुकाबले पचास फीसदी ही मूर्तियां तैयार की है, इसमें भी हमें सभी मूर्तियां बिक जाए इसकी उम्मीद कम हैं। बहुत विशाल मूर्ति बनाने से सब लोग बचे हैं क्योंकि अभी बुकिंग बहुत अधिक संख्या में नहीं हुई है। कुछ ही लोगों ने बुकिंग कराई है। जिन लोगों ने मूर्ति की बुकिंग भी कराई है उन्होंने भी पिछले वर्ष के मुकाबले अपना बजट कम किया है। सत्यवान का कहना है कि धीरे-धीरे ही सही अब जिदंगी पटरी पर लौट रही है।
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निशा ठाकुर