सबहेडः वायुसेना दिवस परेड में 250 की जगह 136 वायु सैनिक हुए शामिल, देशभर की जगह दिल्ली के शामिल हुए अधिक जांबाज, ऑनरेरी ग्रुप कैप्टन सचिन तेंदुलकर नहीं पहुंचे
- एयर वारियर्स की टीम रही नदारद, नहीं हुआ ड्रिल टू ट्रेलर प्रेजेंटेशन
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद/साहिबाबाद। वायुसेना दिवस समारोह में इस बार कोरोना का साफ असर दिखाई दिया। एयरफोर्स डे परेड व अन्य गतिविधियों हर साल करीब 250 वायु सैनिक भाग लेते हैं। लेकिन कोविड-19 के चलते इस बार देशभर के अन्य वायुसेना कैम्पों की जगह दिल्ली व आसपास के 135 जांबाज ही परेड में शामिल हुए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर एवं वायुसेना के ऑनरेरी ग्रुप कैप्टन सचिन तेंदुलकर भी इस बार नहीं पहुंचे।
साथ ही हर साल एयरफोर्स डे की शान रहने वाली एयर वारियर्स की टीम परेड में शामिल नहीं हो सकती। ऐसे में लोगों को ड्रिल टू ट्रेलर प्रेजेंटेशन में थ्री नॉट थ्री राइफल की करतब बाजी नहीं देखने को मिली। वायुसेना की आकाश गंगा टीम के जवानों ने आठ हजार फीट से पैराशूट के साथ कूदकर अपना क्षमता को दिखाया। स्क्वॉर्डन लीडर एम.गोस्वामी ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि आकाशगंगा टीम में दस पैरा ट्रूपर्स अलग-अलग फॉर्मेंसन में नीचे की तरफ जंप करते हैं। कोविड की वजह से अभ्यास में दिक्कत जरूर हुई थी लेकिन अथॉरिटीज के जारी प्रॉटोकोल और गाइडलाइंस के आधार पर ही यह करतब किया गया।
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देश-विदेश के सेना अधिकारियों ने राफेल के सामने कराया फोटोसेशन:
वायुसेना के बेड़े में शामिल हुए लड़ाकू विमान राफेल व स्वदेशी युद्धक विमान तेजस का क्रेज लोगों में देखने को मिला। भारतीय वायुसेना, आर्मी, नेवी के साथ विभिन्न देशों के सेना व वायुसेना अधिकारी मौजूद रहे। आम लोगों के साथ विदेशों से आए सेना अधिकारियों ने राफेल और तेजस विमान के साथ फोटो सेशन कराया। समारोह के बाद राफेल और तेजस के सामने फोटो खिंचाने और सेल्फी लेने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। जबकि वायुसेना के अधिकारी, थल सेना और नेवी के अधिकारियों ने अपनी फैमिली के साथ ग्रुप में राफेल के आगे बैठकर फोटो सेशन कराया।
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वायुसेना के सबसे खतरनाक गरुड़ कमांडो रहे मुस्तैदः
वायुसेना के सबसे खतरनाक दस्ते में शामिल गरुड़ कमांडो सुरक्षा में मुस्तैद रहे। गरुड़ कमांडो का दल हर परिस्थिति और किसी भी तरह के मौसम में दुश्मनों को अपना निशाना बना सकते हैं। इस दस्ते में 20 से 30 कमांडो होते हैं। विशेष तौर पर इस दस्ते के लिए जवानों को एक वर्ष की कड़ी ट्रेनिंग और उससे पहले लिखित परीक्षा देनी होती है। जबकि इसमें कमांडो के शामिल रहने के लिए कोई उम्र सीमा नहीं है। गरुड़ कमांडो को विषम परिस्थिति में कश्मीर में भी तैनात किया जाता है। यह दस्ता छह-छह माह तक अलग-अलग टुकड़ी में कश्मीर में तैनात रहता है। बता दें कि गरुड़ कमांडो को इंडियन एयरफोर्स ने वर्ष 2001 में बनाया था। यह एक स्पेशल फोर्स है। उसका उद्देश्य प्रहार से सुरक्षा करना है। शुरूआत में इसका नाम टाइगर्स फोर्स रखा गया था। वर्ष 2004 से इसे गरुड़ फोर्स में बदला गया। गरुड़ कमांडो बनने में जवानों को करीब तीन वर्ष का समय लग जाता है। काफी लोग गरुड़ कमांडो के साथ भी फ़ोटो लेते नजर आए।
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बहादुरी-उन्नत कार्य के लिए
पदकों से सम्मानित हुए वायुसेना के जांबाज:
वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने वायुसेना के जाबांजों को बहादुरी और उन्नत कार्य के लिए वायुसेना पदक, वायुसेना गैलेंट्री अवार्ड व विशिष्ठ सेवा मेडल समेत अन्य पदकों से सम्मानित किया।पदक पाने वालों में स्क्वार्डन लीडर सुभाष सिंह, सतीश, अनिरुद्ध, रोहित, प्रभाष मलिक, ओसना, गिरीश, तरूण, प्रेम, सुमित गर्ग, समित गुप्ता, दलजीत सिंह, चन्दन, विजय जोशी, संंजय माथुर, नीरज, अनुष गुप्ता, सत्यनारायण, आशीष, हिमांशु, अरिंदम, यशपाल नेगी, नितिन जसवंत, योगेश, अरविंद ठाकुर, वीएससी रॉव, सुशांत अग्रवाल, इरम अहलुवालिया, जसवंत पटेल, एस. विजय कुमार, विक्रम सिंह, अजय राणा, राजीव रंजन, सम्राट धनव, अर्जुन,अनुपम बेनर्जी, सुनील सहित अन्य जांबाज को सम्मान मिला।
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परिचर्चा: वायुसेना वीरों को लोगों ने किया सैल्यूट
1. पैरा जंफर्स को मेरी तरफ से सलाम। उनके साहस और मजबूत इरादों से महसूस होता है कि वायुसेना देश के दुश्मनों को कड़ी टक्कर देने के लिए सक्षम है। पैरा जंफर्स का आठ हजार फीट से फ्लाइंग करना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। -- अंकित, राजेंद्र नगर
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2. पूरे कार्यक्रम में जवानों का एक भी करतब ऐसा नहीं था जो हम से किसी को भी बोर करने वाला हो। देश के जवान किस तरह अपनी जान को हथेली पर रखकर करतब दिखाते हैं। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। वायुसेना के सभी योद्धाओं को सलाम। -- विपुल, दिल्ली
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3. सारंग में महिला पायलट स्नेहा कुलकर्णी और कमेंटेटर अंकिता या फिर निशान टोली में शिवांगी रजावत। महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ता देख बहुत ज्यादा खुशी होती है। गर्व होता है कि बेटियां अब घर से बाहर निकल कर आसमां तक उड़ान भर रही हैं। -- सुरभि, दिल्ली
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4. राफेल को देखने के लिए बहुत ज्यादा मन था। आज उसे पहली बार साक्षात आसमान में करतब करते भी देख लिया। यह मेरे जीवन का यादगार पल बन गया है। वायुसेना के हर एक स्टंट बेहद जोखिम और हैरान करने वाले थे। मगर यह देखकर गर्व भी महसूस होता है। -- चमन सिंह, राजनगर
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5. कभी टीवी में हेलिकॉप्टर उड़ते देखती थी, लेकिन आज खुद यह सब देखकर काफी अच्छा लगा। पहली बार मेरे सामने से ही सारंग, मिग-29 और सबसे बड़ा राफेल जब उड़ा तो करतब देखकर हैरान हो गई। यह सभी जोखिम भारतीय वायुसेना ही कर सकती है। -- मायादेवी, राजनगर