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काली पट्टी बांधकर व्यापारियों ने किया विरोध प्रदर्शन

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बुलंदशहर। कृषि विधेयक का विरोध गल्ला व्यापारियों के साथ अब राजनैतिक दलों और किसानों तक फैलता जा रहा है। जहां एक ओर जनपद भर के किसानों ने इसके विरोध में जाम, प्रदर्शन आदि किए तो वहीं, गल्ला मंडी व्यापारियों ने हड़ताल के पांचवे दिन काली पट्टी बांधकर मंडी समिति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। व्यापारियों के अनुसार पांच दिन की हड़ताल से  करीब ९० करोड़ रूपये से ज्यादा का लेनदेन प्रभावित हुआ है। कृषि विधेयक के विरोध के चलते पांचवे दिन भी जनपद की गल्ला मंडियां बंद रही। गल्ला मंडी सरकार को किसान विरोधी बता रहे हैं। इसके विरोध में जनपद भर के गल्ला व्यापारियों ने मंडी बंद कर हड़ताल कर रखी है। व्यापारियों का कहना है कि अभी यह हड़ताल २६ सितंबर तक है, लेकिन अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन बन सकती है। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। शुक्रवार को भी गल्ला मंडी व्यापारियों ने मंडी समिति कार्यालय पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। दि गल्ला मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में मंडी के अंदर किसानों की उपज खरीदने के लिए कोई मंडी शुल्क निर्धारित नहीं कर रखा है, लेकिन सूबे की सरकार ने व्यापारियों के साथ धोखा कर मंडी के अंदर ढाई प्रतिशत और मंडी के बाहर अनाज खरीदने वाले व्यापारियों को शुल्क मुक्त कर रखा है। महामंत्री चंद्रकांत सिंघल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने भी मंडी शुल्क घटाकर एक प्रतिशत कर दिया है। हमारी मांग है कि या तो सूबे की सरकार मंडी शुल्क पूरी तरह से खत्म करे अथवा हरियाणा सरकार की तर्ज पर एक प्रतिशत तक शुल्क कर दें। इसके चलते मंडी का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है। जनपद भर में ही हजारों लोग बेरोजगार हो गए है। जिसमें पल्लेदार, वाहन चालक, अन्य कर्मचारी शामिल हैं। वहीं, प्रदेश में देखा जाए तो लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। बताया कि कोरोना काल में वैसे ही बेरोजगारी बढ़ रही है और मंडी शुल्क खत्म न कर सरकार नए बेरोजगारों को पैदा कर रही है। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस अवसर पर संजय सिंघल, राहुल सिंह, नदीम, शानू समेत दर्जनों गल्ला मंडी व्यापारी उपस्थित रहे।
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