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रफ्तार पकड़ने लगी जिले की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री, 65 फीसद तक बढ़ा उत्पादन 

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फोटो सहित ---- रफ्तार पकड़ने लगी जिले की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री, 65 फीसद तक बढ़ा उत्पादन  - वाहनों की बिक्री से पटरी पर लौट रहा है उत्पादन - करीब 350 इंडस्ट्री तैयार करती हैं हर तरह के ऑटो पार्ट्स - गाजियाबाद से देश की नामी ऑटोमोबाइल कंपनियां करती हैं डील माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। लॉकडाउन के बाद ये माना जा रहा था कि जिले के उद्योगों को संभलने में बड़ा वक्त लगेगा लेकिन इस चुनौती को उद्योगों ने तीन महीने से कम समय में पर कर लिया है। जिले के उद्योग पटरी पर हैं और उत्पादन की गति 10 या 15 फीसद से बढ़कर 60 से 65 फीसद हो गई है। ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए पार्ट्स तैयार करने वाली इकाईयां अब 65 फीसद तक उत्पादन के साथ काम कर रही हैं। जिले के 27000 उद्योगों में से करीब 350 छोटे-बड़े उद्योग देश की बड़ी-बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए पार्ट्स तैयार करते हैं। वाहनों के इंजन पार्ट्स, क्लच, रिंग्स, कमानी सहित लगभग सभी पार्ट्स जिले के उद्योग तैयार करते हैं। कोरोना की शुरुआत के बाद से ही सभी उद्योगों की तरह ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री भी मुश्किल झेल रही थी और मई में अनलॉकडाउन के बाद उत्पादन 10 फीसद तक रे गया था। अगस्त और सितम्बर में ये उत्पादन 65 फीसद तक पर पहुंच गया है। ---- बाजार ने दिया साथ: मई के आखिर में अनलॉकडाउन शुरू होने के साथ ऑटो डीलर्स ने पुराने ऑर्डर की डिलीवरी दी। जबकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बचने के लिए लोगों ने दुपहिया और चार पहिया वाहनों की खरीदारी भी की। इससे बाजार का लाभ ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को मिला और उत्पादन भी समय के साथ बढ़ता रहा। ---- जिले की ऑटो इंडस्ट्रीज पर एक नजर: इंडस्ट्री: करीब 350 वर्कर: लगभग 28000 सालाना टर्नओवर: 12 हजार करोड़ ---- श्रमिकों, कारीगरों की किल्लत खत्म: पलायन कर गए श्रमिकों और कुशल कारीगरों की किल्लत भी जिले में खत्म हुई है। वर्तमान में ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री में जिले में करीब 28 हजार श्रमिक कार्य कर रहे हैं। ----- पिछले महीनों के मुकाबले उत्पादन बढ़ गया है। सितंबर और अक्टूबर के लिए अच्छे आर्डर हैं। इसके बाद बाजार में मांग के मुताबिक उत्पादन रहेगा। - अशोक शर्मा, जनरल मैनेजर श्रीराम पिस्टन्स ----- जिले के ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को साल भर के आर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। जिनसे उत्पादन भी बढ़ा है। - नंदलाल शर्मा, उद्यमी ---- हमारी यूनिट में वाहनों की कमानी तैयार होती हैं। अनलॉकडाउन के बाद से सभी चुनौती लगभग खत्म हुई हैं और उत्पादन पटरी पर है। - सुनील दत्त त्यागी, उद्यमी ----- पहले ये माना जा रहा था कि उद्योगों को कोरोना के चलते संभलने में मुश्किल होगी लेकिन अब मुश्किलें कम हुई हैं। बाजार में डिमांड निकलने का लाभ उद्योगों को मिल रहा है। - दमन जैन, उद्यमी
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